नई दिल्ली : एक ओर जहाँ विश्व बैंक भूमि सम्मेलन 2025 में भारत ने अपनी दमदार और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है, वहीं केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, एक ओर जहाँ यह कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारा देश हर दिशा में आगे बढ़ रहा है, और यह भी कहा कि भारत माता के चरणों में सर्वस्व न्यौछावर करने के लिए पूरा देश तत्पर है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थियों में कई बार गांव खाली कराए जाते हैं, हम यह आंकलन भी कर रहे हैं कि वहां अभी कौन-सी फसल बोई जाती है, जिसके लिए बीज व प्लांटिंग मटेरियल भी हम तैयार रखेंगे।

वाशिंगटन डी.सी. में 5 से 8 मई 2025 तक चले चार दिवसीय सम्मेलन में भारत ने पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज के नेतृत्व में एक चैंपियन की भूमिका निभाई। सम्मेलन के दौरान समावेशी, प्रौद्योगिकी-संचालित ग्रामीण शासन के मॉडल के रूप में स्वामित्व योजना और ग्राम मानचित्र जैसी भारत की प्रमुख पहलों की ओर वैश्विक ध्यान आकर्षित किया गया। जबकि "भूमि पट्टे और शासन सुधार में अच्छे अभ्यास और चुनौतियां" वाले सत्र में रेखांकित किया गया कि कैसे स्वामित्व के माध्यम से सुरक्षित भूमि स्वामित्व आजीविका में सुधार कर रहा है, महिलाओं को सशक्त बना रहा है और ग्रामीण भारत में ऋण तक पहुंच को सुनिश्चित कर रहा है।
इस सत्र में देशभर के किसानों, महिलाओं और छोटे उद्यमियों की जीवन की सफलता की कहानियों ने भारत में संपत्ति के अधिकारों और औपचारिक भूमि अभिलेखों के जमीनी स्तर पर प्रभाव को प्रदर्शित किया। सत्र में 68,000 वर्ग किमी सर्वेक्षण और 1.16 ट्रिलियन रुपये की भूमि के मुद्रीकरण के साथ, स्वामित्व वैश्विक स्तर पर समावेशी आर्थिक परिवर्तन के लिए एक स्केलेबल मॉडल के रूप में सामने आया।
यहां पंचायती राज मंत्रालय ने “एक अरब लोगों के लिए भूमि अधिकारों को सुरक्षित करना” शीर्षक से एक विशेष सत्र का नेतृत्व किया, जिसमें विश्व बैंक के कई विभागों और कई देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उन्होंने ड्रोन सर्वेक्षण और कानूनी ढांचे से लेकर संपत्ति कार्ड जारी करने और संस्थागत अभिसरण तक स्वामित्व योजना के अंत-से-अंत कार्यान्वयन और प्रभाव पर प्रकाश डाला।सम्मेलन के तकनीकी सत्र में 8 मई को आयोजित "जलवायु कार्रवाई और आपदा जोखिम प्रबंधन के लिए भूमि फाउंडेशन की स्थापना" विषय पर एमओपीआर के संयुक्त सचिव आलोक प्रेम नागर ने ग्राम मानचित्र का प्रदर्शन किया, जो एक भू-स्थानिक नियोजन मंच है जो ग्राम पंचायतों को डेटा-संचालित, स्थानीयकृत विकास योजनाएँ तैयार करने में सक्षम बनाता है।
जलवायु लचीलापन, बुनियादी ढाँचा नियोजन और योजनाओं के अभिसरण को बढ़ावा देने में उपकरण की भूमिका का प्रदर्शन किया गया और वैश्विक दक्षिण संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता की सराहना की गई। अपनी प्रस्तुति में नागर ने क्षमता निर्माण, वित्तीय प्रोत्साहन और सामुदायिक सहभागिता के महत्व पर भी जोर दिया, जिससे ग्राम मानचित्र को आपदा तैयारी और समावेशी विकास के लिए एक दूरदर्शी समाधान के रूप में स्थापित किया गया।

उधर, दिल्ली में शिवराज सिंह चौहान ने वर्तमान परिस्थितियों के मद्देनजर आज कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और ग्रामीण विकास मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में सिंह ने अधिकारियों से फसल बुआई, खाद्यान्न, फल-सब्जी उत्पादन तथा उपलब्धता की जानकारी लेने के साथ मौजूदा परिस्थितियों में किसानों को कहीं-कोई दिक्कत नहीं आने देने के संबंध में दिशा-निर्देश दिए।
बैठक के बाद मीडिया से चर्चा में शिवराज सिंह ने कहा कि भारत माता के चरणों में सर्वस्व न्यौछावर करने के लिए पूरा देश तत्पर है। एक तरफ सीमा पर हमारे जवान तैनात है, पाकिस्तान के हर हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जा रहा है, दूसरी तरफ खेतों में किसान तैयार है, उनके साथ वैज्ञानिक और कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय भी अपनी ड्यूटी समझते हुए पूरी तरह से तैयार है। कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगा।

चौहान ने कहा कि कृषि विभाग के नाते हमारी भी जिम्मेदारी है। हमारी जवाबदारी है खाद्यान्न सुरक्षा सुनिश्चित करना। गेहूं, चावल व अन्य अनाज हमारे पास पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। बंपर उत्पादन हुआ है, किसानों से खरीद भी जारी है।
मीडिया से चर्चा में कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने नारा दिया था जय जवान-जय किसान, पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जोड़ा-जय विज्ञान और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने इसमें जोड़ा-जय अनुसंधान। जवान तैयार है, किसान तैयार है व वैज्ञानिक भी तैयार है, उनका अनुसंधान भी काम आएगा। यह संतोष की बात है कि हमारे पास अन्न के भंडार इस समय भरे हुए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023-24 में कुल खाद्यान्न उत्पादन 3322.98 लाख मीट्रिक टन था, जो 2024-25 में बढ़कर 3474.42 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है।
चावल की भी कोई कमी नहीं है, पिछले साल के 1378.25 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले इस साल 1464.02 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हुआ है। गेहूं पिछले साल था 1132.92 लाख मीट्रिक टन, जो इस बार 1154.30 लाख मीट्रिक टन उत्पादन अनुमानित है, जिसमें और बढ़ोत्तरी की उम्मीद है। श्री शिवराज सिंह ने कृषि वैज्ञानिकों को भी बधाई दी, जिनके द्वारा विकसित किस्मों व शोध के कारण बढ़ते हुए तापमान में भी उत्पादन में वृद्धि हो रही है। गेहूं-चावल दोनों का उत्पादन एक साल में चार से पांच प्रतिशत बढ़ा है।
चावल-गेहूं के भंडार भरे हैं, दालों का बफर स्टाक हमारे पास है, किसी चीज की कोई कमी नहीं है। अगली फसल के लिए भी किसान तैयार है, कल ही खरीफ कांफ्रेंस हुई और हमने तय किया है कि खरीफ सीजन में उत्पादन कैसे बढ़ें, इसके लिए वैज्ञानिक व कृषि कर्मचारी मैदान में निकलेंगे। कृषि मंत्रालय का यह संकल्प है कि हमारी जनता को इन परिस्थितियों में खाद्यान्न की कोई कमी नहीं आएं, खाद्यान्न सुरक्षा सुनिश्चित की है, किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है, भरपूर भंडार है हमारे पास, जितनी जरूरत होगी, उतना खाद्यान्न उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद को पूरी तरह समाप्त करना हमारे देश का संकल्प है। आतंकवादियों को हम नहीं छोड़ेंगे, उनके ठिकाने, उनके अड्डे तबाह करने के लिए कड़ी कार्रवाई की गई है। हमने नागरिकों को निशाना नहीं बनाया है, लेकिन पाकिस्तान जिस तरह से नापाक हरकत कर रहा है, सेना मुंहतोड़ जवाब दे रही है। हर जगह पाकिस्तान मुंह की खा रहा है। हमें अपनी सेना पर, उनके पराक्रम-शौर्य पर गर्व है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में कई बार गांव खाली कराए जाते हैं तो ऐसे में हम यह आंकलन भी कर रहे हैं कि वहां अभी कौन-सी फसल बोई जाती है, जिसके लिए बीज व प्लांटिंग मटेरियल भी हम तैयार रखेंगे। अगर थोड़ी-बहुत लेट भी बोवनी होती है तो उस परिस्थिति में उन्हें क्या आवश्यकता होगी, उसकी चिंता भी हम करेंगे।
