नई दिल्ली : वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 लोकसभा में पारित हो गया। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक सदन में पेश किया और चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने बताया कि यह मुस्लिम समुदाय के हित में है। वक्फ विधेयक को 288 के मुकाबले 232 मतों से सदन की मंजूरी मिल गई। इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित कराने के लिए सदन की बैठक रात लगभग दो बजे तक चली। इसके अलावा मुसलमान वक्फ अधिनियम 1923 का निरसन करने वाला मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 भी सदन में ध्वनि मत से पारित हो गया।
चर्चा के बाद वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 पर विचार के लिए जब किरेन रिजिजू ने प्रस्ताव रखा तो विपक्ष के कुछ सदस्यों ने मत विभाजन की मांग की। इसके पक्ष में 288 और विरोध में 232 मत पड़े। हालांकि, लॉबी क्लीयर करने के बाद कई सदस्यों को सदन में दाखिल होने देने को लेकर विवाद भी हुआ। विपक्षी सदस्यों की आपत्तियों का जवाब देते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि नए संसद भवन में शौचालय की व्यवस्था लॉबी में ही की गई है और सिर्फ लॉबी से ही सदस्यों को अंदर आने दिया गया है। किसी को भी बाहर से आने की अनुमति नहीं दी गई है। जिस समय विधेयक पर मतदान हो रहा था, सदन के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लोकसभा में मौजूद नहीं थे।
वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 पर चर्चा में भाग लेते हुए श्री अमित शाह ने कहा कि वक्फ एक अरबी शब्द है और इसका इतिहास हदीसों से जुड़ा हुआ है। आज जिस तरह से इसका इस्तेमाल किया जाता है, उसका मतलब है अल्लाह के नाम पर संपत्ति का दान या पवित्र धार्मिक उद्देश्यों के लिए संपत्ति का दान। उन्होंने बताया कि वक्फ का समकालीन अर्थ इस्लाम के दूसरे खलीफा हजरत उमर के समय में अस्तित्व में आया। आज की भाषा में वक्फ एक प्रकार का चैरिटेबल एंडॉमेंट है, जिसमें कोई व्यक्ति धार्मिक या सामाजिक कल्याण के लिए संपत्ति दान करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा दान केवल निजी संपत्ति का हो सकता है, सरकारी संपत्ति या किसी और की संपत्ति दान नहीं की जा सकती।
किरेन रिजिजू ने विधेयक पेश करने के दौरान कहा कि वक्फ के पास तीसरा सबसे बड़ा लैंड बैंक है। रेलवे, सेना की जमीनें हैं, यह सब देश की प्रॉपर्टी है, जबकि वक्फ की संपत्ति, प्राइवेट प्रॉपर्टी है। दुनिया में सबसे ज्यादा वक्फ प्रॉपर्टी हमारे देश में है। 60 साल आप सरकार में रहे, फिर भी मुसलमान इतना गरीब क्यों है? उनके लिए क्यों काम नहीं हुआ? गरीबों के उत्थान, उनकी भलाई के लिए काम क्यों नहीं हुए? हमारी सरकार गरीब मुसलमानों के लिए काम कर रही है तो इसमें क्या आपत्ति है? आप लोग जो इस बिल का विरोध कर रहे हैं, देश सदियों तक याद रखेगा कि किसने बिल का समर्थन किया और किसने विरोध किया। आप लोग मुसलमानों को कितना गुमराह करेंगे? देश में इतनी वक्फ प्रॉपर्टी है तो इसे बेकार में पड़ा नहीं रहने देंगे। गरीब और बाकी मुसलमानों के लिए इसका इस्तेमाल किया ही जाना चाहिए। हमने रिकॉर्ड देखा है. सच्चर कमेटी ने भी इसका डिटेल में जिक्र किया है। 2006 में 4.9 लाख वक्फ प्रॉपर्टी थी। इनकी टोटल इनकम 163 करोड़ थी। 2013 में बदलाव करने के बाद इनकम बढ़कर 166 करोड़ हुई। 10 साल के बाद भी 3 करोड़ बढ़ी थी। हम इसे मंजूर नहीं कर सकते।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि वक्फ बोर्ड में धार्मिक दान संबंधी गतिविधियों में किसी भी गैर-इस्लामिक सदस्य को शामिल नहीं किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि धार्मिक संस्थाओं के प्रशासन में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने का कोई प्रावधान नहीं है और वे ऐसा कोई प्रावधान नहीं बनाना चाहते हैं। श्री शाह ने आगे कहा कि विपक्ष गलतफहमियां फैला रहा है और दावा कर रहा है कि यह विधेयक मुसलमानों की धार्मिक गतिविधियों और उनके द्वारा दान की गई संपत्तियों में हस्तक्षेप करने के लिए लाया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विपक्ष अपना वोट बैंक बनाने के लिए अल्पसंख्यक समुदाय में डर पैदा करने की कोशिश कर रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि वक्फ बोर्ड या इसके परिसर में नियुक्त कोई भी गैर-मुस्लिम सदस्य धार्मिक गतिविधियों में शामिल नहीं होगा। उनकी भूमिका केवल यह सुनिश्चित करना होगी कि दान से संबंधित मामलों का प्रशासन नियमों के अनुसार चल रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में वक्फ एक ट्रस्ट की तरह काम करता है, जहाँ ट्रस्टी और मैनेजिंग ट्रस्टी होते हैं। वक्फ में वक्फ (दानकर्ता) और मुतवल्ली (प्रशासक) होते हैं, जो इस्लाम के अनुयायी होते हैं। श्री शाह ने बताया कि वक्फ शब्द स्वयं इस्लाम से आया है, इसलिए केवल इस्लाम को मानने वाले ही वक्फ का प्रबंधन कर सकते हैं। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि वक्फ एक धार्मिक मामला है, लेकिन वक्फ बोर्ड या वक्फ संपत्तियां स्वयं धार्मिक संस्थाएं नहीं हैं। कानून के अनुसार चैरिटी कमिश्नर किसी भी धर्म से हो सकता है, क्योंकि वे किसी ट्रस्ट का प्रबंधन नहीं कर रहे हैं; उनकी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि बोर्ड चैरिटी कानूनों के अनुसार काम करे। श्री शाह ने जोर देकर कहा कि यह एक प्रशासनिक मामला है, धार्मिक नहीं।
श्री अमित शाह ने कहा कि वक्फ बोर्ड की मुख्य भूमिका वक्फ संपत्तियों का दोहन करने वालों की पहचान कर उन्हें हटाना होना चाहिए। उसे उन लोगों पर ध्यान देना चाहिए जिन्होंने सैकड़ों वर्षों से बेहद कम दरों पर वक्फ के नाम पर संपत्तियां लीज पर ले रखी हैं। उन्होंने कहा कि वक्फ से होने वाली आय कम होती जा रही है, जबकि इस पैसे का इस्तेमाल अल्पसंख्यक समुदाय के विकास और इस्लाम की संस्थाओं को मजबूत करने में किया जाना चाहिए। वक्फ बोर्ड और उसके परिसर का मुख्य काम इस पैसे की चोरी को रोकना होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष अपने शासन के दौरान चली आ रही मिलीभगत को जारी रखना चाहता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि यदि 2013 में वक्फ कानून में संशोधन नहीं किया गया होता तो इस विधेयक की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। लेकिन 2014 के चुनाव से पहले 2013 में तुष्टीकरण की खातिर रातों-रात वक्फ कानून में भारी बदलाव किया गया, जिसके कारण दिल्ली के लुटियन जोन में 123 हाई-प्रोफाइल संपत्तियां वक्फ को आवंटित कर दी गईं। दिल्ली वक्फ बोर्ड ने उत्तरी रेलवे की जमीन वक्फ को हस्तांतरित कर दी। हिमाचल प्रदेश में अवैध रूप से जमीन को वक्फ संपत्ति में बदल दिया गया और उस पर अनधिकृत मस्जिदें बना दी गईं। तमिलनाडु में 1500 साल पुराने तिरुचेंदूर मंदिर की 400 एकड़ जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया गया। श्री शाह ने बताया कि कर्नाटक की एक समिति की रिपोर्ट के अनुसार वक्फ की 29,000 एकड़ जमीन को व्यावसायिक उपयोग के लिए पट्टे पर दिया गया। 2001 से 2012 के बीच 2 लाख करोड़ रुपये की वक्फ संपत्तियां निजी संस्थाओं को 100 साल के लिए पट्टे पर दी गईं। उन्होंने यह भी कहा कि 602 एकड़ भूमि के अधिग्रहण को रोकने के लिए बेंगलुरु में उच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा। कर्नाटक के विजयपुर के होनवाड़ गांव में 1500 एकड़ जमीन को विवादित बना दिया गया और 500 करोड़ रुपये की यह जमीन एक पांच सितारा होटल को सिर्फ 12,000 रुपये प्रति माह के किराए पर दे दी गई।

* विपक्ष यह भ्रम फैला रहा है कि यह विधेयक मुसलमानों की धार्मिक गतिविधियों और उनके द्वारा दान की गई संपत्ति में हस्तक्षेप है।
* विपक्ष अल्पसंख्यक समुदाय को डराकर अपना वोट बैंक बनाने की कोशिश कर रहा है।
* सरकार मुस्लिम भाइयों की धार्मिक गतिविधियों और उनके दान से जुड़े ट्रस्टों यानी वक्फ में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती।
* मुतवल्ली, वाकिफ, वक्फ सभी मुसलमान होंगे, लेकिन यह जरूर देखना होगा कि वक्फ की संपत्ति का रखरखाव ठीक से हो रहा है या नहीं।
* वक्फ बोर्ड के धार्मिक दान से जुड़े काम में किसी गैर-इस्लामिक सदस्य को जगह नहीं मिलेगी।
* वक्फ बोर्ड या उसके परिसर में नियुक्त गैर-मुस्लिम सदस्यों का कार्य धार्मिक गतिविधियों से संबंधित नहीं होगा।
* किसी भी धर्म का व्यक्ति चैरिटी कमिश्नर बन सकता है, वह सुनिश्चित करेगा कि बोर्ड चैरिटी कानून के अनुसार चले, यह प्रशासनिक कार्य है, धार्मिक नहीं।
* वक्फ बोर्ड का काम वक्फ संपत्ति बेचने वालों को पकड़कर बाहर निकालना होना चाहिए।
* विपक्ष चाहता है कि उनके राज में जो मिलीभगत चल रही थी, वह चलती रहे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
* अगर 2013 में वक्फ कानून में संशोधन न किया गया होता तो इस विधेयक को लाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
* 2013 में तुष्टिकरण के लिए रातों-रात वक्फ कानून को अतिवादी बना दिया गया, जिसके कारण दिल्ली के लुटियंस जोन की 123 वीवीआईपी संपत्तियां वक्फ को दे दी गई।
* नरेंद्र मोदी सरकार बहुत स्पष्ट सिद्धांत पर चलती है कि हम वोट बैंक के लिए कोई कानून नहीं लाएंगे क्योंकि कानून न्याय और लोगों के कल्याण के लिए होता है।
* सभी को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है, लेकिन लालच, प्रलोभन और भय से धर्म परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
* 2013 में लाए गए संशोधन विधेयक पर दोनों सदनों में कुल साढ़े 5 घंटे चर्चा हुई थी, जबकि इस विधेयक पर दोनों सदनों में 16 घंटे चर्चा हो रही है।
* हमने संयुक्त समिति बनाई, 38 मीटिंग हुई, 113 घंटे चर्चा हुई और 284 स्टेकहोल्डर्स को शामिल किया गया और इन सब से देशभर से करीब एक करोड़ ऑनलाइन सुझाव आए और इन सबका विश्लेषण करने के बाद ये कानून बनाया गया और इसको ऐसे ही खारिज नहीं किया जा सकता।
* यह भारत सरकार का कानून है जो सभी के लिए बाध्यकारी है और सभी को इसे मानना ही होगा।
* 1913 से 2013 तक वक्फ बोर्ड की कुल जमीन 18 लाख एकड़ थी, जिसमें 2013 से 2025 तक 21 लाख एकड़ नई जमीन जुड़ गई।
* 20 हजार संपत्तियां लीज पर दी गई थीं, लेकिन रिकॉर्ड के मुताबिक 2025 में ये संपत्तियां शून्य हो गईं, ये संपत्तियां बिक गई।
* यह विधेयक भूमि को सुरक्षा प्रदान करेगा, किसी की भूमि केवल घोषणा करने से वक्फ नहीं हो जाएगी।
* दान केवल अपनी संपत्ति का ही किया जा सकता है, इसलिए वक्फ बिना स्वामित्व के व्यक्तिगत संपत्ति नहीं ले सकेगा।
* वक्फ संपत्ति घोषित करने का अधिकार समाप्त कर दिया गया है और अब इसे जिला कलेक्टर से प्रमाणित कराना होगा।
* अमित शाह ने जोर देकर कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों में डर पैदा करना एक फैशन बन गया है।
* राम जन्मभूमि, ट्रिपल तलाक और सीएए के समय भी मुस्लिम समुदाय के लोगों में डर पैदा करने की कोशिश की गई, लेकिन मुस्लिम समुदाय भी जानता है कि डरने की कोई बात नहीं है।
* दो साल हो गए, CAA के कारण किसी की नागरिकता नहीं गई, अगर CAA के कारण किसी की नागरिकता गई है तो विपक्ष को यह जानकारी सदन के पटल पर रखनी चाहिए।
* मोदी सरकार का संकल्प है कि इस देश के किसी भी नागरिक को, चाहे वह किसी भी धर्म का हो, कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।
श्री अमित शाह ने कहा कि यह सारा पैसा गरीब मुसलमानों के कल्याण के लिए है, अमीरों की लूट के लिए नहीं। कर्नाटक में दत्तपीठ मंदिर पर दावा किया गया। तलिपरम्बा में 75 साल पुराने दावे के आधार पर 600 एकड़ जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की गई। यहां तक कि ईसाई समुदाय की संपत्ति भी जब्त कर ली गई। उन्होंने कहा कि देश के कई चर्चों ने वक्फ बिल का विरोध किया है क्योंकि वे इसे मुस्लिम समुदाय की सहानुभूति जीतने का जरिया मानते हैं। हालांकि, चार साल में मुस्लिम भाइयों को भी एहसास हो जाएगा कि यह बिल वास्तव में उनके हित में है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि तेलंगाना में 66,000 करोड़ रुपये की 1700 एकड़ जमीन पर दावा किया गया। इसी तरह असम में मोरीगांव जिले में 134 एकड़ जमीन पर दावा किया गया। हरियाणा में गुरुद्वारे से संबंधित चौदह मरला जमीन वक्फ को सौंप दी गई, प्रयागराज में चंद्रशेखर आजाद पार्क को भी वक्फ की संपत्ति घोषित कर दिया गया। महाराष्ट्र में वडांगे गांव में महादेव मंदिर पर दावा किया गया, बीड में वक्फ बोर्ड ने कंकालेश्वर से 12 एकड़ जमीन जबरन ले ली।
श्री अमित शाह ने कहा कि सरकार का मुस्लिम भाइयों की धार्मिक गतिविधियों या उनके द्वारा स्थापित ट्रस्टों, जिसमें वक्फ भी शामिल है, में हस्तक्षेप करने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुतवल्ली, वक्फ और वक्फ उनके नियंत्रण में रहेंगे, लेकिन यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि वक्फ संपत्तियों का उचित रखरखाव हो और उनका उपयोग व्यक्तिगत लाभ के लिए न किया जाए, बल्कि वैध तरीके से किया जाए। उन्होंने सदियों पुरानी दान की गई संपत्ति को मात्र ₹12,000 प्रति माह पर पांच सितारा होटल के लिए पट्टे पर देने के औचित्य पर सवाल उठाया। इसके बजाय, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस धन का उपयोग गरीब मुसलमानों, तलाकशुदा महिलाओं, अनाथ बच्चों और बेरोजगार युवाओं के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए, ताकि उन्हें आत्मनिर्भर और कुशल बनाया जा सके। उन्होंने आगे बताया कि वक्फ के पास लाखों करोड़ रुपये की जमीन है, लेकिन इसकी वार्षिक आय केवल ₹126 करोड़ है, जिससे कुप्रबंधन और दुरुपयोग की चिंता बढ़ जाती है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जब 2013 का संशोधन विधेयक पेश किया गया था, तब तत्कालीन सरकार के वरिष्ठ नेताओं ने वक्फ संपत्ति के दुरुपयोग को रोकने और दोषियों को सजा दिलाने के लिए सख्त कानून बनाने की वकालत की थी। श्री अमित शाह ने जोर देकर कहा कि मौजूदा विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के लिए पारदर्शी ऑडिट प्रणाली स्थापित करना है। उन्होंने बताया कि विपक्ष ने एक संशोधन पेश किया था जिसमें कहा गया था कि वक्फ बोर्ड के आदेशों को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती, जबकि सच्चाई यह है कि विधेयक में कानूनी चुनौतियों की अनुमति है। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि इस विधेयक का पूर्वव्यापी प्रभाव नहीं होगा, लेकिन विपक्ष इसके निहितार्थों के बारे में मुसलमानों में भ्रम पैदा कर रहा है और उनमें भय पैदा कर रहा है।
वक्फ बिल में जिला कलेक्टर की भूमिका के बारे में श्री अमित शाह ने कहा कि देश में जब भी किसी मंदिर के लिए जमीन खरीदी जाती है तो उसका मालिकाना हक कलेक्टर ही तय करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि कलेक्टर द्वारा वक्फ की जमीन की जांच का विरोध क्यों हो रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वक्फ की जमीन सरकार की है या नहीं, यह जांचने का अधिकार केवल कलेक्टर को है।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार का स्पष्ट सिद्धांत है कि वोट बैंक की राजनीति के लिए कोई कानून नहीं बनाया जाएगा, क्योंकि कानून न्याय और जनकल्याण के उद्देश्य से बनाए जाने चाहिए। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि इसी सदन में मोदी सरकार ने महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का कानून पारित किया और पिछड़े वर्गों को संवैधानिक अधिकार दिए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है, लेकिन लालच, प्रलोभन या भय के कारण धर्म परिवर्तन नहीं किया जाना चाहिए।
श्री अमित शाह ने कहा कि 2013 के संशोधन विधेयक पर दोनों सदनों में कुल 5.5 घंटे चर्चा हुई थी, जबकि वर्तमान विधेयक पर 16 घंटे चर्चा हो रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार ने एक संयुक्त समिति बनाई, जिसने 38 बैठकें कीं, 113 घंटे चर्चा की और 284 हितधारकों से परामर्श किया। इसके अतिरिक्त, इस कानून को बनाने से पहले देश भर से एक करोड़ ऑनलाइन सुझाव प्राप्त हुए, जिनका गहन विश्लेषण किया गया। इसलिए इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि सदन में हर सदस्य को अपनी बात रखने की स्वतंत्रता है। यहां किसी एक परिवार का नियंत्रण नहीं है। सांसद जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं, किसी के पक्ष में सदन में उपस्थित नहीं हैं और वे जनता की आवाज उठाएंगे।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि यह कानून भारत की संसद द्वारा बनाया गया है, जो सभी के लिए बाध्यकारी है, इसलिए इसे सभी को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने बताया कि 1913 से 2013 तक वक्फ बोर्ड के पास कुल 18 लाख एकड़ जमीन थी। लेकिन 2013 से 2025 के बीच इस जमीन में 21 लाख एकड़ की वृद्धि हुई है, जिससे कुल जमीन 39 लाख एकड़ हो गई है, जिसमें 2013 के बाद 21 लाख एकड़ और जुड़ गई है। श्री अमित शाह ने आगे बताया कि मूल रूप से 20,000 संपत्तियां पट्टे पर दी गई थीं, लेकिन 2025 के आधिकारिक रिकॉर्ड में अब पट्टे पर दी गई कोई संपत्ति नहीं दिखाई गई है, जो दर्शाता है कि ये संपत्तियां बेची गई हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कैथोलिक और चर्च संगठनों ने इस कानून को अपना समर्थन दिया है और 2013 के संशोधन को अन्यायपूर्ण बताया है।
श्री अमित शाह ने कहा कि यह विधेयक भूमि की सुरक्षा करेगा, यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी भूमि केवल घोषणा करने से वक्फ नहीं बन जाएगी - यह कानून द्वारा संरक्षित होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि पुरातत्व विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की भूमि सुरक्षित रहेगी, और अनुसूची 5 और 6 के अनुसार, आदिवासी भूमि भी संरक्षित रहेगी। साथ ही, इस विधेयक के तहत आम नागरिकों की निजी संपत्ति भी सुरक्षित रहेगी। श्री शाह ने स्पष्ट किया कि केवल अपनी ही संपत्ति दान की जा सकती है, अर्थात वक्फ बिना स्वामित्व के निजी संपत्ति का अधिग्रहण नहीं कर सकता। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, विधेयक में वक्फ अधिनियम में अनिवार्य सूचना प्रकटीकरण प्रक्रिया शामिल की गई है।
गृह मंत्री ने कहा कि किसी संपत्ति को वक्फ घोषित करने का अधिकार समाप्त कर दिया गया है और अब ऐसी घोषणाओं को जिला कलेक्टर द्वारा सत्यापित किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, किसी भी नई वक्फ संपत्ति को पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से पंजीकृत करना होगा। उन्होंने आगे बताया कि मुसलमानों के पास अब वक्फ ट्रस्ट अधिनियम के तहत अपने ट्रस्टों को पंजीकृत करने का विकल्प है, जिससे इस उद्देश्य के लिए अलग से वक्फ कानून बनाने की आवश्यकता नहीं रह गई है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि अल्पसंख्यक समुदाय में डर पैदा करना एक चलन बन गया है। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि मंदिर, ट्रिपल तलाक और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) पर चर्चा के दौरान भी मुसलमानों में डर पैदा करने के लिए इसी तरह के प्रयास किए गए थे। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि मुस्लिम समुदाय अच्छी तरह जानता है कि डरने की कोई बात नहीं है। उन्होंने विपक्ष की आलोचना करते हुए उन्हें याद दिलाया कि उन्होंने झूठा दावा किया था कि सीएए के कारण मुसलमानों की नागरिकता चली जाएगी, लेकिन दो साल बाद भी एक भी व्यक्ति की नागरिकता नहीं गई है। उन्होंने विपक्ष को चुनौती दी कि अगर सीएए के कारण किसी की नागरिकता छीनी गई हो तो वह सदन में सबूत पेश करे। श्री अमित शाह ने आगे कहा कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद भी इसी तरह का डर पैदा करने की कोशिश की गई थी, लेकिन आज जम्मू-कश्मीर में एक चुनी हुई सरकार है, आतंकवाद कम हुआ है, विकास आगे बढ़ रहा है और पर्यटन फल-फूल रहा है।
श्री अमित शाह ने कहा कि विपक्षी दल और उसके सहयोगी दल मुस्लिम समुदाय को डराकर अपना वोट बैंक बनाने की कोशिश कर रहे हैं। गृह मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि मोदी सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि इस देश के किसी भी नागरिक को, चाहे वह किसी भी धर्म का हो, नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।
