तिलक मार्ग (सर्वोच्च न्यायालय) : भारतीय स्वाधीनता संग्राम के तीन हुतात्मा - भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव - की आत्माएं आज तिलक मार्ग के रास्ते दिल्ली गेट से इण्डिया गेट तक जश्ने आज़ादी मानती होंगी। जिस रात आज़ादी के इन क्रांतिकारियों को फांसी दी गयी थी (मुक़र्रर तारीख से एक दिन पहले), भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव खन्ना द्वारा दिल्ली उच्च न्याययालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के घर से कथित रूप से भारी मात्रा में नकदी (जला-भुना सहित) मिलने की आंतरिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करना न्याय के प्रति लोगों का विश्वास बनाये रखने से कम नहीं है। भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को 23 मार्च, 1931 को लाहौर कांस्पिरेसी केस सहित तत्कालीन ब्रिटिश अधिकारी जॉन सौण्डर्स की हत्या के लिए फांसी पर लटकाया गया था।
कल रात 94-वर्ष बाद न्यायमूर्ति खन्ना निश्चित रूप से न्यायालय के प्रति लोगों की आस्था और विश्वास को बरकरार रखने के लिए अपनी रिपोर्ट में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव खन्ना इस बात पर बल देते कि यह एक गहन शोध और जांच का विषय है, न्यायमूर्ति वर्मा का स्पष्टीकरण रद्द कर दिया।
भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को 23 मार्च, 1931 को तत्कालीन अविभाजित भारत के लोगों, राष्ट्र के नेताओं, क्रांतिकारियों, ब्रिटिश अधिकारियों को बिना बताये लाहौर जेल में संध्या 7.30 बजे फांसी पर लटका दिया। बीती देर रात भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश 'आश्चर्यजनक' तरीके से अपनी 25-पृष्ठों की रिपोर्ट को सर्वोच्च न्यायालय के वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दिया।
कल रात सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के घर पर कथित रूप से भारी मात्रा में नकदी मिलने की आंतरिक जांच रिपोर्ट अपनी वेबसाइट पर अपलोड की। दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में आधिकारिक संचार के बारे में जानकारी दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि भारतीय मुद्रा के चार से पांच अधजले बंडल मिले थे। 25 पन्नों की जांच रिपोर्ट में होली की रात यानी 14 मार्च को जस्टिस वर्मा के घर पर आग बुझाने के अभियान के वीडियो और तस्वीरें भी शामिल हैं, जिस दौरान नकदी बरामद की गई थी।
रिपोर्ट में की गई सिफारिश के अनुसार भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय आंतरिक जांच समिति गठित की है। सीजेआई खन्ना ने दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को न्यायमूर्ति वर्मा को कोई न्यायिक कार्य न सौंपने का निर्देश भी दिया है। अपने जवाब में न्यायमूर्ति वर्मा ने कहा कि उनके या उनके परिवार के किसी सदस्य द्वारा स्टोररूम में कभी भी नकदी नहीं रखी गई। उन्होंने कहा कि उनके घर पर नकदी मिलने के आरोप उन्हें फंसाने और बदनाम करने की साजिश लग रहे हैं।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना को अपनी रिपोर्ट में न्यायमूर्ति उपाध्याय ने निष्कर्ष निकाला कि इस घटना की गहन जांच की आवश्यकता है। उन्होंने न्यायमूर्ति वर्मा के इस स्पष्टीकरण को खारिज कर दिया कि जिस स्टोर रूम में कथित रूप से बेहिसाब नकदी पाई गई थी, वह हमेशा खुला रहता है और कोई भी उसमें प्रवेश कर सकता है, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह पैसा किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा वहां रखा गया था और यह न्यायाधीश या उनके परिवार के किसी सदस्य का नहीं था।
रिपोर्ट में कहा गया है, "घटना की रिपोर्ट, उपलब्ध सामग्री और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की प्रतिक्रिया की जांच करने पर, मुझे जो पता चला वह यह है कि पुलिस आयुक्त ने 16 मार्च की अपनी रिपोर्ट में बताया है कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आवास पर तैनात गार्ड के अनुसार, 15 मार्च की सुबह जिस कमरे में आग लगी थी, वहां से मलबा और अन्य आंशिक रूप से जली हुई वस्तुएं हटा दी गई थीं।"
इसमें आगे कहा गया है: "मेरे द्वारा की गई जांच में प्रथम दृष्टया बंगले में रहने वाले लोगों, नौकरों, माली और सीपीडब्ल्यूडी कर्मियों (यदि कोई हो) के अलावा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा कमरे में प्रवेश या पहुंच की संभावना नहीं दिखती है। तदनुसार, मेरी प्रथम दृष्टया राय है कि पूरे मामले की गहन जांच की आवश्यकता है।"
रिपोर्ट में कहा गया है कि अपनी जांच के हिस्से के रूप में, न्यायमूर्ति उपाध्याय ने दिल्ली पुलिस आयुक्त से न्यायमूर्ति वर्मा के मोबाइल फोन के पिछले छह महीनों के कॉल रिकॉर्ड विवरण प्राप्त करने का अनुरोध किया था, और न्यायाधीश से कहा था कि वे हैंडसेट का निपटान न करें, न ही डिवाइस से किसी भी बातचीत, संदेश या डेटा को हटाएं या संशोधित करें। कॉल डिटेल रिकॉर्ड एक पेन ड्राइव में सीजेआई को सौंप दिए गए हैं, जबकि इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड (आईपीडीआर) रिपोर्ट का इंतजार है।
बहरहाल, न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के यहां करोड़ों का कैश बरामद होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। न्यायमूर्ति वर्मा के आधिकारिक आवास के अंदर का पहला वीडियो और तस्वीरें सामने आई है। वीडियो में जले हुए नोटों का बंडल साफ दिखाया दे रहा है। वहीं, वीडियो पर जस्टिस यशवंत वर्मा की प्रतिक्रिया भी आई है। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव खन्ना को सौंपी गई रिपोर्ट में जस्टिस यशवंत वर्मा के घर से बोरियों में अधजले नोटों के बंडल मिलने का वीडियो भी प्रस्तुत किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस कमरे में आग लगी थी वहां आग पर काबू पाने के बाद अधजले भारतीय नोटों के बंडल मिले हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय द्वारा हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा से संबंधित विवाद में दायर जांच रिपोर्ट भी जारी की। अपनी रिपोर्ट में, दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उनका प्रथम दृष्टया मानना है कि पूरे मामले की गहन जांच की जरूरत है।
सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायमूर्ति वर्मा का जवाब भी जारी किया, जिन्होंने आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि यह स्पष्ट रूप से उन्हें फंसाने और बदनाम करने की साजिश प्रतीत होती है। न्यायमूर्ति वर्मा ने स्पष्ट रूप से कहा है कि घर के स्टोर रूम में ‘उनके या उनके परिवार के किसी भी सदस्य ने कभी भी कोई नकदी नहीं रखी थी और वे इस बात का खंडन करते हुए हैं कि कथित नकदी उनकी थी। जिस कमरे में आग लगी और जहां कथित तौर पर नकदी मिली, वह एक आउटहाउस था न कि मुख्य भवन जहां न्यायाधीश और उनका परिवार रहता है। यह स्पष्ट रूप से उन्हें फंसाने और बदनाम करने की साजिश प्रतीत होती है।
मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट में आधिकारिक संचार से संबंधित सामग्री भी शामिल थी, जिसके अनुसार भारतीय मुद्रा की चार से पांच अधजली गड्डियां पाई गईं। पच्चीस पन्नों की जांच रिपोर्ट में होली की रात न्यायमूर्ति वर्मा के आवास पर लगी आग को बुझाने से जुड़े अभियान के वीडियो और फोटोग्राफ भी शामिल हैं, जिसके दौरान नकदी बरामद हुई थी।
न्यायमूर्ति उपाध्याय ने लिखा, ‘‘रिपोर्ट की गई घटना, उपलब्ध सामग्री और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के जवाब की जांच करने पर, मुझे जो पता चला, वह यह है कि पुलिस आयुक्त ने 16.3.2025 की अपनी रिपोर्ट में बताया है कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आवास पर तैनात गार्ड के अनुसार, 15.3.2025 की सुबह जिस कमरे में आग लगी थी, वहां से मलबा और आंशिक रूप से जली हुई अन्य वस्तुएं हटा दी गई थीं। मेरे द्वारा की गई जांच में प्रथम दृष्टया बंगले में रहने वाले लोगों, घरेलू सहायकों, माली और सीपीडब्ल्यूडी कर्मियों (यदि कोई हो) के अलावा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा कमरे में प्रवेश करने या पहुंचने की संभावना सामने नहीं आई है।
पहले कहा गया था कि जज के घर में आग लगने की वजह से गलती से बेहिसाब नकदी बरामद हुई। इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस वर्मा को उनके पैतृक हाईकोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट में वापस भेजने का फैसला किया। हालांकि, शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के जजों की एक फुल कोर्ट मीटिंग के दौरान इस बात पर सहमति बनी कि सिर्फ़ तबादला ही काफी नहीं होगा और आगे की कार्रवाई की ज़रूरत है। कोर्ट ने सर्वसम्मति से इन-हाउस जांच को मंजूरी दे दी, जिसमें पहला कदम तबादला करना था। जबकि तबादला प्रक्रिया में है, इसे अभी भी सरकार की मंज़ूरी का इंतज़ार है।

