सच पूछिए तो कोई कोयला क्षेत्र से जुड़े अधिकारी, पदाधिकारी, नेता चाहते ही नहीं है कि झरिया कोयला खदानों की आग बुझे क्योंकि 'कोयला माफिया' के कई स्वरूप हैं