नई दिल्ली : इधर अठारह यात्री भारतीय रेल से महाकुम्भ नहीं पहुंच सके। नई दिल्ली के प्लेटफार्म नंबर 13 और 16 के बीच हुए दर्दनाक हादसे में मृत्यु को प्राप्त किये। रेल मंत्रालय के तरफ से मृतकों और घायलों को मुआवजा हेतु सूची जारी कर दी हैं। उधर महाकुंभ में भारतीय रेल अपनी विरासत और विकास का प्रदर्शन दिखा रही हैं। इसी को कहते हैं - लाइफ गोज ऑन।
संख्या का राजनीतिकरण हो रहा है। कोई कह रहे हैं भारतीय रेल के अधिकारी मृतकों की संख्या को छिपा रही है। कई लोग रेलवे पटरी और प्लेटफॉर्म पर चप्पल, जूता उठाकर जोड़ी ढूंढने में लगे हैं। कई वस्त्रों और सामानों की गठरियों को खोलकर मृतकों की संख्या को गिन रहे हैं। इधर केन्द्रीय मंत्रिमंडल शिक्षा मंत्रालय के राज्यमंत्री सुकांता मजूमदार 'रेलवे' मंत्रालय पर टिप्पणी दे रहे हैं। 'शिक्षा मंत्रालय' का मंत्री 'रेल मंत्रालय' के बारे में कैसे बोल रहे हैं, समझ से पड़े हैं।
मजूमदार, जो उत्तर-पूर्वी राज्यों के विकास के मामले को भी देख रहे हैं कहते हैं कि "रेल मंत्रालय इस बात की जांच कर रहा है कि क्या "फर्जी खबर" फैलाई गई थी, जिसके कारण शनिवार को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ मच गई। इस हादसे में 18 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। इतना ही नहीं, वे यह भी कहते है कि भारतीय रेलवे भगदड़ के पीछे "साजिश" के पहलू की जांच कर रहा है।"
मजूमदार आगे कहते हैं "रेल मंत्रालय इस घटना की जांच कर रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या कोई साजिश या फर्जी खबर फैलाई गई थी जिसके कारण ऐसी घटना हुई... रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव अपने पद के लिए बेहद सक्षम है।" इस बीच, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की गई है। जो इस पूरे हादसे विस्तार से जांच कर यह बताएगी कि आखिर इसमें कहां-कहां और किस-किस स्तर पर गलती, चूक या लापरवाही रही।

हादसा प्लेटफॉर्म नंबर 13, 14 और 15 के बीच हुआ। महाकुंभ जाने के लिए स्टेशन पर शाम 4 बजे से भीड़ जुटने लगी थी। रात को करीब 8:30 बजे प्रयागराज जाने वाली 3 ट्रेनें लेट हो गईं, जिससे भीड़ बढ़ी। कहते हैं कि प्रयागराज स्पेशल ट्रेन, भुवनेश्वर राजधानी और स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस तीनों ही प्रयागराज जाने वाले थीं। दो ट्रेनें भुवनेश्वर राजधानी और स्वतंत्रता सेनानी बिलम्ब से चल रही थी। इन तीनों ट्रेनों की भीड़ प्लेटफॉर्म-14 पर थी। जब प्रयागराज स्पेशल ट्रेन यहां पहुंची, तभी घोषणा हुई कि भुवनेश्वर राजधानी प्लेटफॉर्म नं. 16 पर आ रही है। सुनते ही 14 पर मौजूद भीड़ 16 की तरफ भागी। इनमें 90% प्रयागराज जाने वाले थे। अचानक ट्रेन आने की घोषणा से लोग बिना टिकट प्लेटफार्म की तरफ भागे। इससे भगदड़ मची।
अभी तक मृतकों की पहचान 79 वर्षीय आहा देवी, 41 वर्षीय पिंकी देवी, 50 वर्षीय शीला देवी, 25 वर्षीय व्योम, 40 वर्षीय पूनम देवी, 35 वर्षीय ललिता देवी, 11 वर्षीय सुरुचि; 40 साल की कृष्णा देवी, 15 साल के विजय साह, 12 साल के नीरज, 40 साल की शांति देवी, 8 साल की पूजा कुमार, 34 साल की संगीता मलिक और पूनम, 40 साल की ममता झा, 7 साल की रिया सिंह, 24 साल की बेबी कुमारी और 47 साल के मनोज शामिल हैं। भारतीय रेलवे ने मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को 2.5 लाख रुपये तथा मामूली रूप से घायलों को 1 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है।
बहरहाल, प्रयागराज में आयोजित महाकुम्भ 2025 डबल इंजन सरकार के विरासत और विकास के प्रतिमान का एक सफल उदाहरण बनता जा रहा है। भारतीय रेलवे भी इसी क्रम में महाकुम्भ में जहां एक ओर सफल भीड़ प्रबंधन और रिकार्ड मेला स्पेशल ट्रेनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को उनके गंतव्य तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, वहीं दूसरी ओर मेला क्षेत्र में लगी रेलवे की प्रदर्शनी भारतीय रेलवे में विरासत और विकास के प्रतिमानों को प्रदर्शित कर रही है। महाकुम्भ में लगी रेलवे की प्रदर्शनी में चिनाब और पंबन ब्रिज के माडल प्रदर्शित किये गये हैं तो वहीं रेलवे की आधुनिकतम् तकनीकि से युक्त नमो भारत, अमृत भारत और वंदे भारत की स्लीपर ट्रेन के बारे में आमजन को बताया जा रहा है। इसके साथ ही भारतीय रेलवे के देश के युद्ध और महत्वपूर्ण अवसरों पर किये गये योगदान को प्रदर्शित किया गया है।
भारतीय रेलवे न केवल देश के यातायात की लाइफ लाइन है बल्कि देश की सांस्कृति विविधता को एक सूत्र में बांधने का कार्य करती है। भारतीय रेलवे देश को कश्मीर से कन्याकुमारी तक और गुजरात से अरूणाचल तक जोड़ने का कार्य करती है। यहीं नहीं डबल इंजन सरकार के विरासत और विकास के ध्येय की सबसे बड़ी वाहक भारतीय रेलवे है। जिसका प्रदर्शन महाकुम्भ में लगी रेलवे की प्रदर्शनी में किया गया है। महाकुम्भ मेला क्षेत्र के सेक्टर-1 में लगी रेलवे की प्रदर्शनी में देश की आधुनिकतम् तकनीकि से बने चेनाब और पंबन ब्रिज के माडल का प्रदर्शन किया गया है।जम्मू कश्मीर में बना चेनाब ब्रिज दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज है। चेनाब नदी पर बने रेल ब्रिज की ऊचांई नदी तल से 359 मीटर है जो फ्रांस के एफिल टॉवर से भी 35 मीटर अधिक है। तो वहीं दूसरी ओर रामेश्वरम को जोड़ने वाला पंबन ब्रिज, पूर्णतः स्वचालित वर्टिकल लिफ्ट स्पैन देश का ऐसा पहला समुद्री रेल पुल है। इसको भी प्रदर्शनी में शामिल किया गया है।

भारतीय रेलवे की प्रदर्शनी में मोदी सरकार की ओर से देश की दी जा रही आधुनिकतम् तकनीक युक्त ट्रेनें अमृत भारत, नमो भारत और वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों की जानकारी दी जा रही है। अमृत भारत ट्रेन जहां सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन है तो वहीं नमो भारत देश की पहली ईएमयू ट्रेन हैं जो केवल 40 मिनट में मेरठ से अशोक नगर की दूरी तय करेगी। इसके साथ ही रेलवे प्रदर्शनी में 1965, 1971 ओर कारगिल युद्ध के दौरान रेलवे की सेवाओं के बारे में बताया गया है। साथ ही डबल इंजन सरकार के सनातन आस्था के तीर्थस्थलों तक श्रद्धालुओं की पहुंच को सुलभ बनाने वाली ट्रेनों के बारे में बताया जा गया है। भारतीय रेलवे ने महाकुम्भ क्षेत्र में तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए अस्थाई टिकट घरों के साथ इलेक्ट्रानिक डिस्प्ले बोर्ड के साथ पूछताछ कक्ष और बहुभाषी अनाउसंमेंट की भी व्यवस्था की है। इसको भी प्रदर्शनी में जगह मिली है।
