गया / पटना : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दरभंगा पहुँचते हैं तो 'मैथिली' में भाषण की शुरुआत करते हैं। भागलपुर जाते हैं तो 'अंगिका' में भाषण का श्रीगणेश करते हैं। गयाजी आते हैं तो 'मगही' बोलने लगते हैं। चम्पारण आते हैं तो 'भोजपुरी' में भाषण की शुरुआत करते हैं। जनता उनके मुख से 'मैथिली', 'अंगिका', 'मगही', 'भोजपुरी' भाषाओँ में बोलते ताली ठोकने में कोई कोताही नहीं करती । अच्छी बात है आखिर प्रधानमंत्री आपकी भाषाओँ में बोल रहे हैं भले यह राजनीति से ओतप्रोत हो।
लेकिन दुर्भाग्य यह है कि मिथिला, अंगिका, भोजपुरी, मगही क्षेत्रों में रहने वाले 'अशिक्षित' लोगों की तो बात ही नहीं करें, शिक्षित और विद्वान-विदुषी अपनी जमीन पर भी, अपने घरों में भी, अपने सगे-सम्बन्धियों से भी, यहाँ तक कि अपने माता-पिता, दादा-दादी, भाई-बहनों, बाल-बच्चों के साथ भी अपनी भाषाओँ में नहीं बात करते। प्रधानमंत्री बनने से पहले जब माननीय नरेंद्र मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उस कालखंड में कभी 'मैथिली', 'अंगिका', 'बज्जिका', भोजपुरी' या 'मगही' भाषाओँ में बात करते, भाषण देते नहीं सुना।
भले प्रधानमंत्री आज मगही भाषा में यह कहें हों: 'विश्व विख्यात, ज्ञान और मोक्ष के पवित्र नगरी गयाजी के हम प्रणाम करअ ही," या "विष्णुपद मंदिर के इ गौरवशाली भूमि पर अपने सबके अभिनंदन करीत ही," कहकर भाषण की शुरुआत किये हों। अपने संबोधन में यह दोहराये हों कि "गयाजी की ये धरती, अध्यात्म और शांति की धरती है। ये भगवान बुद्ध को बोध कराने वाली पावन भूमि है। गयाजी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत बहुत प्राचीन है, बहुत समृद्ध है। यहां के लोगों की इच्छा थी कि इस नगरी को गया नहीं, गयाजी कहा जाए। मैं इस निर्णय के लिए बिहार सरकार का अभिनंदन करता हूं," लेकिन वे वह नहीं किये जो आज से दस वर्ष पूर्व वचन दिए थे 'बोधगया' में ।
5 सितम्बर, 2015 को भारत के नवनिर्वाचित प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी बौद्ध की अनेकानेक गरिमाओं को उद्धृत किये थे। प्रधानमंत्री बनने के बाद श्री मोदी का पहला बिहार दौरा था। बिहार ही नहीं, बोधगया ही नहीं, सम्पूर्ण राष्ट्र के के लोगों में ख़ुशी की एक लहर जागृत हुयी थी कि प्रधानमंत्री की अगुआई में शायद इस प्रदेश का, बुद्ध के इस स्थल का कल्याण हो जाय। आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक और अन्य संस्थागत विरासतों के उपस्थिति के बाबजूद बिहार का बोधगया के पिछड़ापन पर ध्यान जाय। उन्होंने विश्वास दिलाया कि "बोध गया को संस्कृति शहर घोषित किया जायेगा। उस दिन मंच पर बिहार के तत्कालीन राज्यपाल रामनाथ कोविंद भी उपस्थित थे। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू भी बैठे थे। उस उपस्थिति के बाद कोविंद साहब की मुलाकात राष्ट्रपति भवन में ही हुई। एक पिछड़े प्रदेश के राज्यपाल से भारत के राष्ट्रपति के रूप में प्रोनत्ति बुद्ध से जुड़े सभी लोगों के मन में, खासकर बोधगया के दबे-कुचले, पिछड़े लोगों के मन में विश्वास की एक किरण जगी – शायद मेरा भी कल्याण होगा । समय गुजरता गया।
प्रधानमंत्री अपने दूसरे कालखंड में भी प्रवेश लिए। कोविंद साहेब राष्ट्रपति के कार्यालय से अवकाश प्राप्त पर ‘पूर्व राष्ट्रपति’ हो गए। जिस भवन में अवकाश के बाद (12 जनपथ), उस आवास के पूर्व मालिक (दिवंगत राम विलास पासवान) ने अपने जीवन काल में बुद्ध को राजनीतिक गलियारे में स्वहित में खूब घुमाये, खूब बेचे। परन्तु गौतम बुद्ध को, उनके शहर बोधगया को अपने ही जगह वह स्थान नहीं मिला सका (अब तक भी) जिसका वह हकदार था, आज भी है। इसे कहते हैं ‘लाभ के लिए राजनीति’, लेकिन आज प्रदेश के लोगों की निगाहें प्रधानमंत्री पर टिकी है, एक विश्वास के साथ – बुद्ध का कल्याण होगा । बोधगया आज तक आधिकारिक रूप से संस्कृति का शहर नहीं बना। यूनाइटेड नेशन्स एजुकेशनल, साइंटिफिक एंड कल्चरल आग्रेनाइजेशन (यूनेस्को) ने विश्व धरोहरों की संभावित सूची में जिन ऐतिहासिक विरासतों को शामिल किया है, उनमें बिहार की दो महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरें भी हैं। एक है – विश्व प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष और दूसरा है – शेरशाह सूरी का सासाराम स्थित मकबरा। इसके पहले, यूनेस्को की धरोहर-सूची में बिहार से एकमात्र बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर ही शामिल था।

इस सूचना क्रांति के युग में जब हाथ पुस्तक पलटने से ज्यादा माउस पर जाते हैं; राज्य के सूचना विभाग, पर्यटन मंत्रालय एवं संस्कृति मंत्रालय की वेबसाइट जानकारियों के लिहाज से निराश करती हैं। वहां आठवीं कक्षा के इतिहास की पुस्तक जितनी भी जानकारी नहीं है। सरकारी साइटों से ज्यादा जानकारी विकिपीडिया या बिहार खोज खबर डॉट कॉम पर मिलती है। पर्यटन विकास निगम की वेबसाइट पर सरसरी नजर डालते समझ में आ जाता है कि विभाग की मंशा पर्यटकों को आकर्षित करने की तो नहीं ही है। सरकारी साइटों पर जो जानकारी है, वह आधी-अधूरी है। पर्यटन निगम ने अपनी वेबसाइट पर जो जानकारी दी है, उसमें बौद्ध स्थल वैशाली, बोधगया, राजगीर,पावापुरी और नालंदा के साथ कुशीनगर का भी जिक्र है। कहना नहीं होगा कि कुशीनगर उत्तर प्रदेश में है। पहले यह गोरखपुर मंडल का हिस्सा हुआ करता था, अब स्वतंत्र जिला है। इसका बिहार से कोई मतलब नहीं है। अब अगर इसे बुद्ध के निर्वाण स्थल के रूप में बुद्ध संभाग से जोड़ा गया है तो फिर सारनाथ, श्रावस्ती के साथ-साथ कपिलवस्तु (नेपाल) एवं लुंबिनी (नेपाल) ने क्या गलती की, जिसके कारण वे वेबसाइट पर स्थान नहीं पा सके? होना चाहिए था कि बुद्ध से जुड़े स्थलों को एक पैकेज के रूप में दिखाया जाता। इससे दुविधा नहीं होती।
चलिए छोड़िये उन बातों को अभी चुनाव का समय है और प्रधानमंत्री। आज भी, गयाजी की पावन भूमि से, एक ही दिन में, 12 हजार करोड़ रुपए की परियोजनाओं का लोकार्पण या शिलान्यास हुआ है। इनमें ऊर्जा, स्वास्थ्य और शहरी विकास के जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट्स हैं। इनसे बिहार के उद्योगों को ताकत मिलेगी, और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे। मैं इन परियोजनाओं के लिए बिहार के लोगों को बधाई देता हूं। बिहार में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए यहां हॉस्पिटल और रिसर्च सेंटर का उद्घाटन भी हुआ है। अब बिहार के लोगों को कैंसर के इलाज के लिए एक और सुविधा मिल गई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मेरा एक बड़ा संकल्प है। जब तक हर जरूरतमंद को पक्का घर नहीं मिल जाता, मोदी चैन से नहीं बैठेगा। इसी सोच के साथ पिछले 11 साल में 4 करोड़ से अधिक गरीबों को पक्के घर बनाकर दे दिए गए हैं। अकेले हमारे बिहार में 38 लाख से अधिक आवास बनाए गए। गया जिले में भी 2 लाख से अधिक परिवारों को अपना पक्का घर मिला है। और हमने सिर्फ घर यानी 4 दीवारें नहीं दी, बल्कि इन घरों के साथ गरीब को उसका स्वाभिमान दिया है। इन घरों में बिजली, पानी, शौचालय और गैस कनेक्शन की सुविधाएं दी हैं। यानी, गरीब परिवारों को भी सुविधा, सुरक्षा और सम्मान से जीने की गारंटी मिली है। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए, बिहार के मगध क्षेत्र के 16 हजार से ज्यादा परिवारों को अपना पक्का घर दिया है। यानि इस बार इन परिवारों में दीवाली और छठ पूजा की रौनक और ज्यादा होगी। मैं अपना घर पाने वाले सभी लाभार्थी परिवारों को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। और जो लोग अब भी पीएम आवास योजना के लाभ से छूट गए हैं, मैं उन्हें विश्वास दिलाता हूं, कि पीएम आवास का अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक हर गरीब को अपना पक्का घर नहीं मिल जाता।
प्रधानमंत्री ापब तक मगही भाषा से बहुत दूर होकर हिंदी भाषा में भाषण दे रहे थे। बिहार चन्द्रगुप्त मौर्य और चाणक्य की धरती है। जब-जब किसी दुश्मन ने भारत को चुनौती दी है, बिहार देश की ढाल बनकर खड़ा हुआ है। बिहार की धरती पर लिया हुआ हर संकल्प, ये धरती की ताकत है, इस धरती पर लिया गया हर संकल्प कभी खाली नहीं जाता। बिहार का तेज विकास केंद्र की NDA सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता है। इसलिए आज बिहार चौतरफा विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। बीते वर्षों में पुरानी समस्याओं के समाधान तलाशे गए हैं, और नई प्रगति के रास्ते भी बनाए गए हैं। आप याद करिए, लालटेन राज में यहाँ कैसी दुर्दशा थी। लालटेन राज में ये क्षेत्र लाल आतंक से जकड़ा हुआ था। माओवादियों की वजह से शाम के बाद कहीं आना-जाना मुश्किल था। गयाजी जैसे शहर लालटेन राज में अंधेरे में डूबे रहते थे। हजारों गाँव ऐसे थे, जहां बिजली के खंबे तक नहीं पहुंचे थे। लालटेन वालों ने पूरे बिहार के भविष्य को अंधेरे में धकेल दिया था। न शिक्षा थी, न रोजगार था, बिहार की कितनी पीढ़ियों को इन लोगों ने बिहार से पलायन के लिए मजबूर कर दिया था।
प्रधानमंत्री का मानना है कि बिहार के लोगों को आरजेडी और उसके साथी सिर्फ अपना वोटबैंक मानते हैं, उन्हें गरीब के सुख-दुख, गरीब के मान-सम्मान से कोई मतलब नहीं है। आपको याद होगा, कांग्रेस के एक मुख्यमंत्री ने मंच से कह दिया था कि अपने राज्य में बिहार के लोगों को घुसने नहीं देंगे। बिहार के लोगों से कांग्रेस की इतनी नफरत, बिहार के लोगों के प्रति इतनी घृणा, और कोई भूल नहीं सकता। कांग्रेस का बिहार के लोगों के प्रति जो दुर्व्यवहार देखने के बाद भी यहां आरजेडी वाले गहरी नींद में सोये पड़े थे। बिहार की NDA सरकार, कांग्रेस और इंडी गठबंधन वालों के इस नफरती अभियान का जवाब दे रही है। बिहार के बेटे-बेटी को यहीं पर रोजगार मिले, सम्मान की जिंदगी मिले, मां-बाप की वो देखभाल कर सके, इसी सोच के साथ हम काम कर रहे हैं। अब बिहार में बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स बन रहे हैं।
गयाजी जिले के डोभी में बिहार का सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल एरिया तैयार हो रहा है। गयाजी में एक टेक्नोलॉजी सेंटर की स्थापना भी की जा रही है। आज ही यहां बक्सर थर्मल पावर प्लांट का शुभारंभ भी हुआ है। कुछ ही महीने पहले मैंने औरंगाबाद में भी नवीनगर सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी थी। भागलपुर के पीरपैंती में भी नया थर्मल पावर प्लांट बनेगा। इस पावर प्लांट्स से बिहार में बिजली की आपूर्ति बढ़ेगी। और आप सब जानते हैं, जब बिजली उत्पादन बढ़ता है तो क्या होता है? घरों में बिजली की सप्लाई बढ़ती है, और उद्योगों को भी ज्यादा से ज्यादा बिजली मिलती है। और इससे भी रोजगार के नए मौके बनते हैं।
बिहार के युवाओं को पक्की सरकारी नौकरी देने के लिए नीतीश जी ने बड़ा अभियान चलाया हुआ है। ये नीतीश जी हैं, तभी यहां शिक्षकों की भर्ती भी पूरी पारदर्शिता से हुई। यहां के नौजवानों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में बिहार में ही रोजगार मिले, उन्हें नौकरी के लिए पलायन न करना पड़े, इसमें केंद्र सरकार की एक नई योजना से भी बहुत बड़ी मदद मिलने वाली है। अभी पिछले सप्ताह, इस 15 अगस्त से ही देशभर में प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना लागू हुई है। इसके तहत, हमारे युवा जब निजी क्षेत्र में पहली नौकरी करेंगे, तो केंद्र सरकार उन्हें अपने पास से 15,000 रुपये देगी। जो प्राइवेट कंपनियां युवाओं को रोजगार देंगी, उन्हें भी अलग से पैसे सरकार देगी। इस योजना का बहुत बड़ा लाभ बिहार के मेरे युवाओं को भी होगा।
हमारे देश में कांग्रेस हो, आरजेडी हो, इनकी सरकारों ने कभी जनता के पैसे का मोल नहीं समझा। इनके लिए जनता के पैसे का मतलब रहा है- खुद की तिजोरी भरना। इसलिए कांग्रेस-आरजेडी की सरकारों में सालों साल तक परियोजनाएं पूरी नहीं होती थीं। कोई योजना जितनी लटकती थी, उतना उसमें ये पैसे कमा लेते थे। अब इस गलत सोच को भी एनडीए सरकार ने बदल दिया है। अब शिलान्यास के बाद कोशिश होती है, जल्द से जल्द, समय सीमा में उस काम को पूरा करने के लिए सफल प्रयास किया जाए। आज का ये कार्यक्रम इसका भी एक शानदार उदाहरण है। औंटा–सिमरिया सेक्शन का शिलान्यास करने का सौभाग्य बिहार के लोगों ने मुझे दिया था। और आप लोगों की कृपा देखिए, आप लोगों का प्रेम देखिए कि जिस ब्रिज का शिलान्यास आपने मुझे करने के लिए कहा, आज उसका लोकार्पण करने का अवसर भी आपने मुझे दिया है। ये पुल सिर्फ सड़कों को नहीं, पूरे उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने का काम करेगा। जो भारी वाहन पहले गांधी सेतु से होकर 150 किलोमीटर का लंबा चक्कर काटते थे, अब सीधा रास्ता पाएंगे। इससे व्यापार तेज़ होगा, उद्योगों को ताक़त मिलेगी, और तीर्थयात्रियों का भी पहुंचना आसान होगा। विकास के जिन प्रोजेक्ट्स की नींव एनडीए सरकार में रखी जाती है, वो पूरा होकर रहेंगे, ये बात पक्की है।
एनडीए की डबल इंजन सरकार यहां रेलवे के विकास के लिए भी तेजी से काम कर रही है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत गयाजी रेलवे स्टेशन को आधुनिक बनाया जा रहा है। इससे गयाजी रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं मिलेगी। आज गया वो शहर है जहां राजधानी, जनशताब्दी और मेड इन इंडिया वंदे भारत ट्रेनों की सुविधा उपलब्ध है। गयाजी, सासाराम, प्रयागराज, कानपुर होते हुए दिल्ली तक सीधा कनेक्शन, बिहार के युवाओं को, यहां के किसानों को, यहां के व्यापारियों के लिए नई संभावनाएं बना रहा है।
प्रधानमंत्री कि आपके आशीर्वाद से, देश के अटूट भरोसे के कारण, साल 2014 में प्रधानमंत्री के तौर पर शुरू हुआ मेरा सेवाकाल, ये सेवाकाल निरंतर जारी है। इतने वर्षों में हमारी सरकार पर भ्रष्टाचार का एक भी दाग नहीं लगा। जबकि आज़ादी के बाद कांग्रेस की सरकारें, जो 60-65 साल तक सरकार में रही हैं, उनके भ्रष्टाचार की लंबी लिस्ट है। आरजेडी का भ्रष्टाचार तो बिहार का बच्चा-बच्चा जानता है। मेरा साफ मानना है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई को अगर अंजाम तक पहुंचाना है, तो कोई भी कार्रवाई के दायरे से बाहर नहीं होना चाहिए। आप सोचिए, आज कानून है कि अगर किसी छोटे सरकारी कर्मचारी को 50 घंटे तक हिरासत में रख दिया, तो अपने आप वो सस्पेंड हो जाता है, ड्राइवर हो, छोटा क्लर्क हो, उसकी जिंदगी हमेशा-हमेशा के लिए तबाह हो जाती है। लेकिन अगर कोई मुख्यमंत्री है, कोई मंत्री है, कोई प्रधानमंत्री है, तो वो जेल में रहकर के भी सत्ता का सुख पा सकता है। ये कैसे हो सकता है? हमने कुछ समय पहले ही देखा है कि कैसे जेल से ही फाइलों पर साइन किए जा रहे थे, जेल से ही सरकारी आदेश निकाले जा रहे थे। नेताओं का अगर यही रवैया रहेगा, तो ऐसे भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई कैसे लड़ी जा सकती है?
इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि संविधान हर जनप्रतिनिधि से ईमानदारी और पारदर्शीता की उम्मीद करता है। हम संविधान की मर्यादा को तार-तार होते नहीं देख सकते। इसलिए एनडीए सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ एक ऐसा कानून लाई है, जिसके दायरे में देश का प्रधानमंत्री भी है। इस कानून में मुख्यमंत्री और मंत्रियों को भी शामिल किया गया है। जब ये कानून बन जाएगा, तो प्रधानमंत्री हो या मुख्यमंत्री, या फिर कोई भी मंत्री, उसे गिरफ़्तारी के 30 दिनों के अंदर जमानत लेनी होगी। और अगर जमानत नहीं मिली, तो 31वें दिन उसे कुर्सी छोड़नी होगी। आप कहिए भाइयों, जो जेल जाएं उसे कुर्सी छोड़नी चाहिए कि नहीं छोड़नी चाहिए? क्या वो कुर्सी पर बैठे रह सकता है क्या? क्या वो सरकारी फाइलों पर साइन कर सकता है क्या? क्या जेल में से कोई सरकार चला सकता है क्या? और इसलिए ऐसा सख्त कानून बनाने की तरफ हम आगे बढ़ रहे हैं।
राजनीति की बात करते प्रधानमंत्री कहते हैं ये RJD वाले, ये कांग्रेस वाले, ये लेफ्ट वाले इस कानून का विरोध कर रहे हैं। ये बहुत गुस्से में हैं, और कौन नहीं जानता कि उनको किस बात का डर है? जिसने पाप किया होता है, वो अपने पाप को दूसरों से छुपाता है, लेकिन खुद तो भीतर से जानता है कि क्या खेल खेला है। इन सबका भी यही हिसाब है। ये आरजेडी और कांग्रेस वाले, कोई बेल पर बाहर हैं, कोई रेल के खेल में अदालत के चक्कर लगा रहा है। और जो जमानत पर बाहर घूम रहे हैं, वे आज इस कानून का विरोध कर रहे हैं। इन्हें लगता है कि अगर ये जेल चले गए, तो इनके सारे सपने चकनाचूर हो जाएंगे। और इसलिए, सुबह–शाम ये लोग मोदी को भांति-भांति की गाली दे रहे हैं। और इतने बौखलाए हुए, इतने बौखलाए हुए हैं कि इस जनहित के कानून का विरोध कर रहे हैं। हमारे राजेंद्र बाबू, बाबा साहेब आंबेडकर ने कभी सोचा भी नहीं था, कभी कल्पना भी नहीं की होगी कि सत्ता के भूखे लोग भ्रष्टाचार करेंगे और जेल जाने पर भी कुर्सी से चिपके रहेंगे। लेकिन अब भ्रष्टाचारी जेल भी जाएगा और उसकी कुर्सी भी जाएगी। भारत को भ्रष्टाचार से मुक्त होने का संकल्प देश के कोटि-कोटि लोगों का है। ये संकल्प सिद्ध होकर रहेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि मैंने लाल किले से एक और खतरे की बात की है। और ये खतरा बिहार पर भी है। देश में घुसपैठियों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय है। बिहार के सीमावर्ती जिलों में तेजी से डेमोग्राफी बदल रही है। इसलिए एनडीए सरकार ने तय किया है कि देश का भविष्य घुसपैठियों को नहीं तय करने देंगे। घुसपैठियों को बिहार के युवाओं के रोजगार नहीं छीनने देंगे। जिन सुविधाओं पर भारतीय लोगों का अधिकार है, उस पर घुसपैठियों को डाका नहीं डालने देंगे। इस खतरे से निपटने के लिए मैंने डेमोग्राफी मिशन शुरू करने की बात कही है। बहुत जल्द ये मिशन अपना काम शुरू करेगा, हम हर घुसपैठिए को देश से बाहर करके ही रहेंगे। आप मुझे बताइए, इन घुसपैठियों को निकालना चाहिए कि नहीं निकालना चाहिए? क्या ये घुसपैठियें आपका रोजगार छीन लें, आपको मंजूर है? एक घुसपैठिया आपकी जमीन पर कब्जा कर ले, आपको मंजूर है? एक घुसपैठिया आपका हक छीन लें आपको मंजूर है? बिहार के आप सभी लोग देश के भीतर बैठे घुसपैठियों के समर्थकों से भी सावधान रहिए, जान जाइए कौन घुसपैठियों के साथ खड़ा है। कांग्रेस और आरजेडी जैसे दल बिहार के लोगों का हक छीनकर घुसपैठियों को देना चाहते हैं। तुष्टिकरण के लिए, वोटबैंक को बढ़ाने के लिए कांग्रेस-आरजेडी वाले कुछ भी कर सकते हैं, कितने ही नीचे जा सकते हैं। इसलिए बिहार के लोगों को बहुत सतर्क रहना है।