रायसीना पहाड़ (नई दिल्ली): दीनदयाल उपाध्याय मार्ग से देश के संसद के रास्ते कल्याणमार्ग तक राजनीतिक हवा का तापमान दिल्ली के प्राकृतिक तापमान से अधिक है। वजह यह है कि आखिर इण्डिया ब्लॉक के उम्मीदवार सेवानिवृत्त न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को 300 मत कैसे प्राप्त हो गए? राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि इस विषय पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन शीघ्र ही राष्ट्रीय स्तर पर चिंतन-मनन सम्बन्धी बैठक करने वाली है। साल 1992 से अब तक के संपन्न उपराष्ट्रपति के चुनाव में सीपी राधाकृष्णन को जो मत मिले हैं, वह सांख्यिकी तालिका में न्यूनतम मत पाने वाले उम्मीदवारों में दूसरे नंबर पर है। अब तक के चुनाव में सबसे कम मत 1997 में कृष्णकांत को मिला था। इतना ही नहीं, 'असामयिक पद से इस्तीफा' देने वाले जगदीप धनकड़ का नाम अधिकतम मन प्राप्त करने वालों की तालिका में तीसरे नंबर पर उद्धृत है। विशेषज्ञों का मानना है कि 'असामयिक' रूप से धनकड़ को पद से इस्तीफा देना पर सकता है, लेकिन सांख्यिकी तालिका पर अंकों को कैसे मिटाया जा सकता? यहाँ तो भारत का निर्वाचन आयोग भी सांख्यिकी के साथ छेड़-छाड़ नहीं कर सकता।
निर्विरोध चयनित भारत के उपराष्ट्रपतियों, जैसे सर्वपल्ली राधाकृष्णन, गोपाल स्वरुप पाठक, मोहम्मद हिदायतुल्लाह, शंकर दयाल शर्मा को अगर छोड़ दिया जाय, तो 1952 से अब तक के हुए चुनावों में के.आर. नारायणन और ज़ाकिर हुसैन को सबसे अधिक मत मिले थे। विगत दिनों 'असामयिक पद त्याग करने वाले' जगदीप धनकड़ अधिकतम मत प्राप्त करने वालों में तीसरे उपराष्ट्रपति बने थे, जिन्हें एक विशाल मत समूह प्राप्त हुआ था। वैसे 79-वें जश्ने आज़ादी के वर्ष में सी.पी. राधाकृष्णन के रूप में देश को नया उपराष्ट्रपति मिला है, लेकिन रायसीना पहाड़ पर राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कृष्णकांत को छोड़कर सन 1952 से 2025 तक के चुनाव में सीपी राधाकृष्णन को सबसे कम मत प्राप्त हुए हैं, जबकि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार है।
विगत दिनों जब कांस्टीच्यूशन क्लब का चुनाव हुआ था, उस चुनाव में जिस तरह भाजपा के उम्मीदवार को भाजपा का ही उम्मीदवार परास्त किया था, उपराष्ट्रपति के लिए कल के चुनाव में जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवार को मात्र 452 मत मिलना गहन शोध का विषय हो सकता है। चुनाव आयोग के अनुसार, उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए कुल वोटर संख्या 788 थी। इसमें 7 पद रिक्त रहने के कारण प्रभावी वोटर संख्या 781 रही। कुल 767 सांसदों ने वोट डाले। परिणामों में राधाकृष्णन को 452 प्रथम वरीयता वोट मिले, जबकि सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट प्राप्त हुए। कुल 15 वोट अमान्य घोषित किए गए।
कांग्रेस वरिष्ठ नेता और संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने पहले एक्स पर जाकर दावा किया था कि सभी 315 विपक्षी सांसदों ने 100 प्रतिशत मतदान किया। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि सभी 315 विपक्षी सांसद वास्तव में आए और मतदान किया, जैसा कि दावा किया गया था, और फिर भी भारत ब्लॉक उम्मीदवार को केवल 300 वोट कैसे मिले?इससे एक महत्वपूर्ण और अपरिहार्य प्रश्न उठता है कि क्या 15 विपक्षी सांसदों ने एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग की? यदि ऐसा है, तो यह केवल मतदान की कवायद नहीं थी - यह एकता का एक मौन उल्लंघन था, जो इंडिया ब्लॉक के भीतर आंतरिक दरारों का संकेत देता है, जबकि इसके नेता सार्वजनिक रूप से एकजुट मोर्चा पेश करते हैं।
बहरहाल, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन भारत का 15वां उपराष्ट्रपति चुने गए। उन्होंने विपक्षी इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार, सेवानिवृत्त न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 वोटों से हराया। उपराष्ट्रपति चुनाव कल सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक हुआ, जिसमें 98.20 प्रतिशत मतदान हुआ। चुनाव आयोग के अनुसार, उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए कुल वोटर संख्या 788 थी। इसमें 7 पद रिक्त रहने के कारण प्रभावी वोटर संख्या 781 रही। कुल 767 सांसदों ने वोट डाले। परिणामों में राधाकृष्णन को 452 प्रथम वरीयता वोट मिले, जबकि सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट प्राप्त हुए। कुल 15 वोट अमान्य घोषित किए गए। कुल 13 सांसदों ने मतदान से परहेज किया, जिनमें सात सांसद बीजेडी से, चार बीआरएस से, एक शिरोमणि अकाली दल से और एक निर्दलीय सांसद शामिल थे।
इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने मतदान किया। उपराष्ट्रपति का पद 21 जुलाई 2025 से खाली था, जब जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया था।
चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन का जन्म 20 अक्टूबर 1957 को तमिलनाडु के तिरुपुर में हुआ। वे बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं और दो बार कोयंबटूर से सांसद रह चुके हैं। वे 1974 में भारतीय जनसंघ से जुड़े और बाद में भाजपा तमिलनाडु के सचिव बने। 1998 और 1999 में वे लोकसभा चुनाव जीते और संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष रहे। वे पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स, वित्तीय परामर्श समिति और शेयर बाजार घोटाले की विशेष समिति के सदस्य भी रहे। राधाकृष्णन ने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक के रूप में शुरुआत करके वे 1974 में भारतीय जनसंघ की राज्य कार्यकारिणी समिति के सदस्य बने। 1996 में उन्हें तमिलनाडु में बीजेपी का सचिव नियुक्त किया गया। इसके बाद वह कोयंबटूर से लोकसभा सांसद बने। सांसद रहते हुए वे संसदीय स्थायी समिति (कपड़ा मंत्रालय) के अध्यक्ष रहे। इसके अलावा सी पी राधाकृष्णन स्टॉक एक्सचेंज घोटाले की जांच के लिए बनी विशेष संसदीय समिति के सदस्य थे। 2004 में सी पी राधाकृष्णन ने संसदीय प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया। वे ताइवान जाने वाले पहले संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी थे।
उन्होंने 2004 से 2007 तक भाजपा तमिलनाडु इकाई की अध्यक्षता की और 19,000 किमी लंबी ‘रथ यात्रा’ का नेतृत्व किया। इस यात्रा का उद्देश्य नदियों को जोड़ने, आतंकवाद उन्मूलन, समान नागरिक संहिता लागू करने, छुआछूत खत्म करने और नशीली दवाओं के खिलाफ अभियान चलाना था। राधाकृष्णन 2016 से 2020 तक कोयर बोर्ड, कोच्चि के अध्यक्ष भी रहे, जहां उनके नेतृत्व में नारियल उत्पादों का निर्यात रिकॉर्ड 2532 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वे 2020 से 2022 तक भाजपा के अखिल भारतीय प्रभारी भी रहे। उन्होंने फरवरी 2023 से जुलाई 2024 तक झारखंड के राज्यपाल और अतिरिक्त कार्यभार के तौर पर तेलंगाना और पुडुचेरी के उपराज्यपाल का पद संभाला। 31 जुलाई 2024 से वे महाराष्ट्र के राज्यपाल थे।
इस मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए राधाकृष्णन को बधाई दी और कहा कि सार्वजनिक जीवन में उनके दशकों का अनुभव राष्ट्र की प्रगति में सहायक होगा। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने जुलाई में पद छोड़ने के बाद अपने पहले सार्वजनिक बयान में अपने उत्तराधिकारी सी.पी. राधाकृष्णन को हार्दिक बधाई दी। राधाकृष्णन को लिखे एक पत्र में उन्होंने कहा कि नए उपराष्ट्रपति का पदभार ग्रहण करना देश के प्रतिनिधियों के विश्वास और भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने आगे कहा कि सार्वजनिक जीवन में श्री राधाकृष्णन के विशाल अनुभव को देखते हुए, उनके नेतृत्व में उपराष्ट्रपति का पद "अधिक सम्मान और गौरव प्राप्त करेगा"।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज थिरु सी.पी. राधाकृष्णन को 2025 के उपराष्ट्रपति चुनाव में उनकी जीत पर बधाई दी। प्रधानमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा: “थिरु सी.पी. राधाकृष्णन जी को 2025 के उपराष्ट्रपति चुनाव में विजयी होने पर बधाई। वे एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने अपना जीवन समाज सेवा और गरीबों व वंचितों के सशक्तिकरण के लिए समर्पित कर दिया है। मुझे विश्वास है कि वे एक उत्कृष्ट उपराष्ट्रपति के रूप में कार्य करेंगे जो हमारे संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ करेंगे और संसदीय संवाद को बेहतर बनाएंगे।”
वहीं गृहमंत्री अमित शाह ने राधाकृष्णन को बधाई देते हुए कहा कि उनकी दूरदर्शिता और प्रशासनिक ज्ञान हमारे संसदीय लोकतंत्र को मजबूती देगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लिखा कि राधाकृष्णन का अनुभव, संवैधानिक और विधायी मामलों की समझ तथा जनता के साथ जुड़ाव उनकी नई भूमिका को और सशक्त बनाएगा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी शुभकामनाएं दीं और कहा कि उनकी लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता भारत की आवाज को वैश्विक स्तर पर और मजबूत करेगी। इस प्रकार एनडीए समर्थित उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन देश के नए उपराष्ट्रपति बने और सभी नेताओं ने उनके सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं दी हैं।
सन 1952 के चुनाव में सर्वपल्ली राधाकृष्णन निर्विरोध चुने गए थे। उनके बाद जाकिर हुसैन को 568 (97.59 %) मत मिले थे। वीवी गिरी को 483 (71.45%), बीडी जेत्ती को 521 (78.70), आर. वेंकटरमन को 508 (71.70), केआर नारायणन को 700 (99.86%), वेंकैया नायडू को 516 (67. 89 %) और जगदीप धनकड़ को 528 (74 . 37 %) मत मिले थे। सीपी राधाकृष्णन सहित तीन अन्य उपराष्ट्रपति अपने चुनाव में चार सौ के अंक नहीं पार कर पाए थे। कृष्णक्त को 441 मत (6176 %) मत मिले थे, जबकि भैरो सिंह शेखावत को 454 मत (59 . 82%, मोहम्मद हामिद अंसारी को 455 (60 . 50 %) मत मिले थे।
उपराष्ट्रपति का चुनाव परोक्ष होता है, जिसके निर्वाचक मंडल यानी इलेक्टोरल कॉलेज में राज्यसभा और लोकसभा के सांसद शामिल होते हैं. राष्ट्रपति चुनाव में चुने हुए सांसदों के साथ विधायक भी मतदान करते हैं लेकिन उप राष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सांसद ही वोट डाल सकते है। ख़ास बात यह है कि दोनों सदनों के लिए मनोनीत सांसद राष्ट्रपति चुनाव में मतदान नहीं कर सकते लेकिन वे उप राष्ट्रपति चुनाव में वोटिंग कर सकते हैं। उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पूरा हो जाने के 60 दिनों के अंदर चुनाव कराना ज़रूरी होता है। इसके लिए चुनाव आयोग एक निर्वाचन अधिकारी नियुक्त करता है जो मुख्यत: किसी एक सदन का महासचिव होता है।
निर्वाचन अधिकारी चुनाव को लेकर पब्लिक नोट जारी करता है और उम्मीदवारों से नामांकन मंगवाता है. उप राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार के पास 20 प्रस्तावक और कम से कम 20 अन्य अनुमोदक होने चाहिए। प्रस्तावक और अनुमोदक राज्यसभा और लोकसभा के सदस्य ही हो सकते हैं। उम्मीदवार को 15 हज़ार रुपए भी जमा कराने होते हैं।इसके बाद निर्वाचन अधिकारी नामांकन पत्रों की जांच करता है और योग्य उम्मीदवारों के नाम बैलट में शामिल किए जाते हैं। कोई व्यक्ति भारत का उप राष्ट्रपति चुने जाने के लिए तभी योग्य होगा जब वह कुछ शर्तों को पूरा करता हो। जैसे, वह भारत का नागरिक होना चाहिए, उम्र 35 साल से कम नहीं होनी चाहिए और वह राज्यसभा के लिए चुने जाने की योग्यताओं को पूरा करता हो। अगर कोई भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन कोई लाभ का पद रखता है तो वह उप राष्ट्रपति चुने जाने के योग्य नहीं होगा।