कलयुग है : यहाँ तो 'देवी-देवताओं' का राजनीतिकरण हो रहा है, फिर गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों, उनके भोजन 'लिट्टी-चोखा', 'कूड़ा-कचड़ा' को कैसे छोड़ेंगे - कुछ भी हो सकता है