नई दिल्ली : नई दिल्ली: देश के 14वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने के बाद (26 मई, 2014), यानी 20 मार्च, 2015 जम्मू आक्रमण के बाद, जिसमें छः व्यक्ति की हत्या हुई थी, से लेकर विगत 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हत्याकांड तक कुल 500 से अधिक विदेशी पर्यटकों के साथ-साथ भारत का आम नागरिक, आतंकवादियों के गोलियों के शिकार हुआ है, मृत्यु को प्राप्त किया है। इन वर्षों में तक़रीबन 29 आधिकारिक रूप से आतंकवादी हमले हुए हैं, जिसमें करीब एक दर्जन जम्मू और कश्मीर में - मसलन बारामुला, हंदवारा, नगरोटा, अनंतनाग, संजुवन, अवंतीपोरा, जम्मू सिटी, किस्तवार, पूंच, रासी और पहलगाम - में ही हुए हैं। यह कहना वैसे कठिन है कि केंद्रीय गुप्तचर एजेंसियों में तालमेल है अथवा नहीं, सुरक्षा-सूचना और पुख्ता इंतजामात के मामले में भारत के गृहमंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के बीच आदान-प्रदान है अथवा नहीं; लेकिन लगातार घट रही घटनाएं प्रश्नचिन्ह तो अवश्य लगाती है।
यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के अलावे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, गुप्तचर एजेंसियों के आला अधिकारी, रक्षा इंटेलिजेंस के शीर्षस्थ पदाधिकारी बेहतर जानते होंगे, लेकिन इन वर्षों में घट रही घटनाओं के मद्देनजर यह शंका उठना स्वाभाविक है कि कहीं केंद्रीय ख़ुफ़िया एजेंसी, गुप्तचर शाखा या अन्य जो देश में सुरक्षा व्यवस्था कायम रखने के लिए जिम्मेदार हैं, दो फांक में ही नहीं, सहस्त्र फांकों में तो नहीं बंटे हैं ? इस मामले में रायसीना हिल पर चुप्पी है।
लेकिन रायसीना पहाड़ के सूत्रों के मुताबिक देश के आतंरिक और बाह्य सुरक्षाकर्मियों, गुप्तचर विभागों को अगर देखें तो यह भी स्पष्ट दीखता है कि ये ख़ुफ़िया एजेंसियां आधी उनकी है और आधी उनकी है। यानी आधिकारिक तौर पर यदि देखा जाय तो आधी एजेंसी और उसके अधिकारी भारत के गृह मंत्री के प्रति उत्तरदायी है, जबकि आधी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के प्रति। यह अलग बात है कि दोनों देश के प्रधानमंत्री के प्रति जवाबदेह हैं; तथापि दोनों प्रधानमंत्री तक पहुँचने/पहुँचाने से पूर्व आपस में सूचनाओं का आदान-प्रदान अथवा सूचनाओं के आधार पर क्रियान्वयन करने की दिशा में साँझा चूल्हा जलाते हैं अथवा नहीं, यह करोड़ों नहीं अरबों, खरबों का प्रश्न है।
वैसे व्यावहारिक दृष्टि से इस बात का भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि भारत के गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के बीच 'मुंह दिखाई' में सामान्यतया नहीं के बराबर है। बातचीत तो पूछे ही नहीं। इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता है कि यदि शीर्षस्थ अधिकारी के बीच सकारात्मक संबंध नहीं होने का असर नित्य के क्रिया कलापों पर नहीं पड़ता होगा।
रायसीना हिल पर सूत्रों का मानना है कि एक ओर जहाँ नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड, जो कोर सुरक्षा एजेंसियों के डेटाबेस को जोड़ता है, गृहमंत्री के प्रति जबाबदेह है। इसी तरह आतंकवाद से मुक़ाबला करने वाला सभी तंत्र, केंद्रीय ख़ुफ़िया एजेंसी अमित शाह के टेबुल पर अपना क्रियाकलाप रखती है; वहीँ जॉइंट इंटेलिजेंस कमिटी (JIC), अनुसन्धान और विश्लेषण विंग (RAW), राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (NTRO), रक्षा ख़ुफ़िया एजेंसी (DIA) और अन्य राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल के प्रति जबाबदेह है।

वैसी स्थिति में आधुनिक तकनिकी, शीर्षस्थ श्रमशक्ति, बेहतरीन सेवा सुविधा, बेहतरीन प्रशिक्षण, बेहिसाब मौद्रिक व्यवस्था इत्यादि की उपलब्धिता के बाद भी सूचनाओं पर (यदि इंटेल है तो) अमल करने में देर कैसे हो जाती है? बहुत बड़ा शोध का विषय हैं। लेकिन फिर वही सवाल यह है कि पूछेगा कौन? क्योंकि घटना घटित होने के बाद ही विभाग और अधिकारी घटनों के बारे में विस्तार से चर्चा करने लगते हैं। यह कहने लगते हैं 'इंटेल' था। सवाल यह है कि अगर 'इंटेल था' तो आप सभी सोये क्यों रहे ?
आइये, वापस रायसीना पहाड़ पर। अप्रैल महीने का 22 तारीख। इधर दिल्ली में राजस्व विभाग (डीओआर) ने विदेश मंत्रालय (एमईए) और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (एनएससीएस) के सहयोग से मध्य एशियाई गणराज्यों (सीएआर) के लिए ‘क्रिप्टोकरेंसी, क्राउडफंडिंग और गैर-लाभकारी संगठनों के जरिए आतंकवाद को मिलने वाले वित्तपोषण (सीएफटी) का मुकाबला करने’ पर पहली बार क्षमता निर्माण कार्यक्रम का दो-दिवसीय आयोजन किया। उधर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों ने 28 पर्यटकों को छल्ली कर ढ़ेर कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश यात्रा पर थे।
पांच मध्य एशियाई देशों- उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान के वरिष्ठ विशेषज्ञों को एक साथ लाने वाले उस कार्यक्रम ने आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने में जानकारी के आदान-प्रदान और क्षेत्रीय सहयोग के लिए एक मंच के तौर पर काम किया। प्रतिभागियों को भारतीय अधिकारियों की ओर से संचालित सत्रों की एक श्रृंखला से लाभ हुआ, जिसमें राजस्व विभाग, गृह मंत्रालय के वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) सेल, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और वित्तीय खुफिया इकाई - भारत (एफआईयू-आईएनडी) के प्रतिनिधि शामिल थे। इसके अतिरिक्त, यूरेशियन ग्रुप (ईएजी), एक एफएटीएफ- शैली क्षेत्रीय निकाय (एफएसआरबी) के एक विशेषज्ञ ने गैर-लाभकारी और आभासी संपत्ति क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने (एएमएल/ सीएफटी) मानकों पर बहुमूल्य जानकारी प्रदान की।

आतंकवादी हमले में 28 से ज्यादा पर्यटक मारे गए हैं, जिसमें एक इजरायली और एक इतावली नागरिक शामिल थे। यह हमला बीते दो दशक में जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों पर सबसे बड़ा हमला है। इससे पहले बीते साल मई में पर्यटकों पर हमला हुआ था, जिसमें दो टूरिस्ट मारे गए थे। हमले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सऊदी यात्रा को बीच में छोड़कर देश वापस लौट आए। प्रधानमंत्री तक्षण पहलगाम आतंकी हमले को लेकर तुरंत एयरपोर्ट पर बड़ी बैठक किये। इस बैठक में पीएम मोदी के साथ अजित डोभाल और एस जयशंकर भी मौजूद थे। जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम हिल स्टेशन पर आतंकवादियों ने एक पर्यटक ग्रुप पर हमला कर दिया। कई लोग घायल हो गए।यह हमला पहलगाम के बैसरन इलाके में हुआ है, जहां आतंकवादियों ने पर्यटकों के एक समूह को निशाना बनाया। घटना के बाद गृह मंत्री अमित शाह श्रीनगर पहुंचे।
उधर, मुस्लिम वर्ल्ड लीग के महासचिव शेख डॉ. मोहम्मद बिन अब्दुलकरीम अल-इसा ने जेद्दा में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से भेंट की। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में हुए भीषण आतंकी हमले की कड़ी निंदा की और इस घटना में मारे गए निर्दोष लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। प्रधानमंत्री मोदी ने जुलाई 2023 में नई दिल्ली में महासचिव के साथ अपनी बैठक का स्मरण किया। उन्होंने सहिष्णु मूल्यों को प्रोत्साहन देने, संयम का समर्थन करने और सामाजिक सामंजस्य तथा सद्भाव बढ़ाने में मुस्लिम वर्ल्ड लीग की भूमिका की प्रशंसा की। प्रधानमंत्री ने भारत के सदियों पुराने दर्शन वसुधैव कुटुम्बकम [विश्व एक परिवार है] का स्मरण करते हुए कहा कि भारत एक बहु-सांस्कृतिक, बहुभाषी, बहु-जातीय और बहु-धार्मिक समाज के रूप में विविधता में एकता का उत्सव मनाता है। श्री मोदी ने कहा कि भारत की अविश्वसनीय विविधता एक मूल्यवान शक्ति है जिसने इसके जीवंत समाज और राजनीति को साकार किया है। उन्होंने उग्रवाद, आतंकवाद और हिंसा के विरुद्ध मुस्लिम वर्ल्ड लीग के दृढ़ समर्थन की प्रशंसा की। प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि भारत सऊदी अरब के साथ अपने संबंधों को बहुत महत्व देता है, जो आज कई क्षेत्रों में एक स्थायी साझेदारी के रूप में विकसित हो गया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच घनिष्ठ सामाजिक-सांस्कृतिक संबंध इस साझेदारी का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
इधर दिल्ली में मध्य एशियाई क्षेत्र की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किए गए उस कार्यक्रम का उद्देश्य तकनीकी क्षमता का निर्माण करना और उभरते आतंकवाद वित्तपोषण जोखिमों की समझ को गहरा करना था। संवादात्मक चर्चाओं, केस स्टडी और परिचालन संबंधी सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के जरिए, इस पहल ने प्रमुख चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक सहयोगी दृष्टिकोण को प्रोत्साहन दिया। तकनीकी सत्रों में आतंकवाद से संबंधित जांच में वित्तीय खुफिया जानकारी के उपयोग, वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (वीएएसपी) के दुरुपयोग से पैदा होने वाले बढ़ते खतरे और क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म के शोषण सहित कई मुद्दों पर चर्चा की गई। अतिरिक्त चर्चाओं में कट्टरपंथीकरण के वित्तपोषण और आतंकवादी उद्देश्यों के लिए गैर-लाभकारी संगठनों (एनपीओ) के दुरुपयोग को शामिल किया गया। कहते हैं कि यह पहल आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ क्षेत्रीय सहयोग और तन्यकशीलता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो वैश्विक आतंकवाद विरोधी प्रयासों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा, "इस जघन्य कृत्य के पीछे जो लोग हैं, उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। उन्हें बख्शा नहीं जाएगा! उनका नापाक एजेंडा कभी सफल नहीं होगा। आतंकवाद से लड़ने का हमारा संकल्प अडिग है तथा यह और भी मजबूत होगा।"
प्रधानमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा: "मैं जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करता हूं। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है, उनके प्रति मेरी संवेदना है। मैं प्रार्थना करता हूं कि घायल लोग जल्द से जल्द ठीक हो जाएं। प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है। इस जघन्य कृत्य के पीछे जो लोग हैं, उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जाएगा...उन्हें बख्शा नहीं जाएगा! उनका नापाक एजेंडा कभी सफल नहीं होगा। आतंकवाद से लड़ने का हमारा संकल्प अडिग है तथा यह और भी मजबूत होगा।"
इस भयानक आतंकवादी हमले की इज़राइल के भारत में राजदूत, रेउवेन अज़ार ने कड़ी शब्दों में निंदा की। उन्होंने भारत को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में प्रौद्योगिकी, कार्यप्रणाली और खुफिया जानकारी जैसे क्षेत्रों में निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया। राजदूत अज़ार ने कहा, "यह एक दिल दहला देने वाला हमला है। यह क्रूर है, और वहां से आने वाली कहानियां भयानक हैं। यह एक निर्दयी बर्बर हमला है"। उन्होंने आगे कहा, "हम इसकी निंदा करते हैं और हम बचे लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करते हैं।"

उधर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, "मैं देशवासियों को विश्वास दिलाता हूं कि पहलगाम की घटना को देखते हुए, सरकार हर आवश्यक और उचित कदम उठाएगी।" उन्होंने कहा है कि आतंक के खिलाफ हमारी जीरो टॉलरेंस नीति है। हम आतंकियों को मुंहतोड़ और जोरदार तरीके से जवाब देंगे। आतंक के खिलाफ पूरा देश एकजुट है। पर्दे के पीछे छिपे लोगों ने नहीं बख्शा जाएगा। इस हमले के मास्टरमाइंड को भी नहीं छोड़ेंगे। ऐसा जवाब मिलेगा कि पूरी दुनिया देखेगी। वरिष्ठ कांग्रेस नेता करण सिंह ने बुधवार को पहलगाम आतंकवादी हमले की निंदा की और कहा कि यह घटना "चौंकाने वाली और सभ्य व्यवहार के सभी मानदंडों से परे" है।कांग्रेस नेता करण सिंह ने आतंकी हमले को 'निर्दयी और बर्बर' बताते हुए कहा कि पहलगाम में नागरिकों का 'नरसंहार' रातों रात हमला नहीं था, बल्कि एक सावधानीपूर्वक नियोजित निष्पादन था।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' लिखा कि 'एमएनएस की ओर से इस हमले में जिन लोगों की मौत हुई है, उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि. यह घटना अत्यंत गंभीर है और इस कठिन समय में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना सरकार के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। केंद्र सरकार को इन हमलावरों का ऐसा बंदोबस्त करना चाहिए कि आने वाली दस पीढ़ियां भी इस घटना को याद कर कांप उठे। 1972 में म्यूनिख ओलंपिक के दौरान जब फिलिस्तीनी आतंकवादियों ने इजरायली खिलाड़ियों पर हमला किया था, तब इजरायल ने उन आतंकवादियों और इस हमले के सूत्रधारों को इस प्रकार खत्म किया था कि लंबे समय तक फिलिस्तीनियों के दिलों में दहशत घर कर गई थी. भारत और इजरायल के संबंध मजबूत हैं। "
इस हमले से ठीक 75 दिन पहले पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हमास, लश्कर और जैश के आतंकी सरगनाओं की एक बड़ी रैली हुई थी। कहा जाता है कि उस रैली में आतंकवादी सरगना सार्वजनिक रूप से सामने दिखे थे। पहलगाम का यह हमला सात अक्टूबर 2023 को हमार द्वारा इजरायल पर किए गए हमले से काफी मिलता-जुलता है। हालांकि भारतीय एजेंसियों का अभी तक इस हमले में हमास के हाथ होने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। इजरायल पर अक्टबूर 2023 के हमले के बाद मध्य पूर्व में भीषण युद्ध शुरू हो गया। इजरायली हमले में 50 हजार से अधिक फिलिस्तीन मारे जा चुके हैं। यह माना जाता है कि पहलगाम के इस हमले के लिए आतंकवादियों ने पूंछ के रास्ते का इस्तेमाल किया होगा।

इसी साल 5 फरवरी को पाक अधिकृत कश्मीर के रावलकोट में कश्मीर सॉलिडैरिटी एंड हमास ऑपरेशन अल अक्सा फ्लड नाम से सम्मेलन हुआ था। कहते हैं कि उस सम्मेलन में 90 से 100 आतंकवादी शामिल हुए थे। इनमें से अधिकतर आतंकवादी विदेशी थे। यह भी कहा जाता है कि उसके आयोजन का मकसद पाकिस्तान और फिलिस्तीन को इजरायल और भारत के खिलाफ एकजुट करना था। उस सम्मेलन में हमास के कई बड़े नेता भी शामिल हुए थे जिसमें डॉ. खालिद कद्दूमी, डॉ. नाजी जहीर, मुफ्ती आजम आदि प्रमुख थे। भारत आधिकारिक तौर पर हमास को आतंकवादी संगठन नहीं मानता है। यह भी कहा जाता है कि इस बैठक में भारत का मोस्ट वांटेड आतंकवादी मसूद अजहर का भाई तल्हा सैफ भी मौजूद था।
बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान ने जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए कायराना आतंकवादी हमले पर दुख और गुस्सा व्यक्त किया है, जिसमें कई लोगों की जान चली गई। इस आतंकी हमले से पूरा देश स्तब्ध है और राजनीतिक दलों के साथ-साथ विश्व नेताओं ने भी इसकी कड़ी निंदा की है। शाहरुख खान ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर निर्दोष लोगों की जान जाने पर अपना दुख व्यक्त किया और पूरे देश के लोगों से "मजबूत और एकजुट" रहने का आग्रह किया। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "पहलगाम में हुई विश्वासघात और अमानवीय हिंसा की घटना पर दुख और गुस्सा व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं। ऐसे समय में, कोई केवल भगवान की ओर मुड़ सकता है और उन परिवारों के लिए प्रार्थना कर सकता है जिन्होंने दुख झेला है और मेरी गहरी संवेदना व्यक्त कर सकता है। हम, एक राष्ट्र के रूप में, एकजुट, मजबूत खड़े रहें, और इस जघन्य कृत्य के लिए न्याय की तलाश करें।"
भावनगर के रहने वाले यतीश परमार और उनके बेटे स्मित, जो पहलगाम में आतंकवादी हमले में मारे गए थे, के शवों को बुधवार शाम को मुंबई ले जाया गया। महाराष्ट्र के जो छह पर्यटक हमले में मारे गए, उनमें से चार लोगों के शवों को मुंबई और दो को पुणे ले जाया गया। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, अपने जीवन भर कड़ी मेहनत करने के बाद, वह 'धरती पर स्वर्ग' देखने गए थे, लेकिन अब वह घर मृत लौटेंगे। दिलीप देसले, 64 वर्ष, के दोस्तों ने बुधवार को पहलगाम आतंकी हमले में उनकी मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हुए यह बात कही। नवी मुंबई के पड़ोसी इलाके न्यू पनवेल के रहने वाले देसले उन 26 लोगों में शामिल थे, जिन्हें मंगलवार को जम्मू और कश्मीर के पहलगाम शहर में आतंकवादियों ने गोली मार दी थी। वह और उनकी पत्नी निसर्ग पर्यटन टूर्स के 37 सदस्यों के समूह का हिस्सा थे, जो सोमवार को कश्मीर घूमने गए थे।देसले चार साल पहले ठाणे-बेलापुर औद्योगिक क्षेत्र में एक रसायन और स्नेहक निर्माण कंपनी में काम करने के बाद सेवानिवृत्त हुए थे।

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग ज़िले का पहलगाम — जो आमतौर पर अपनी खूबसूरती और सुकून के लिए जाना जाता है इन्हीं में से एक थे सैयद आदिल हुसैन शाह, एक स्थानीय घुड़सवार जो पर्यटकों की सवारी कराते थे और अपने परिवार के लिए एकमात्र कमाने वाले थे। आदिल न सिर्फ़ अपने घर के लिए एक सहारा थे, बल्कि इलाके के उन चुनिंदा लोगों में से थे जो मेहनत और ईमानदारी से रोज़ी कमाते थे। जब हमला हुआ, आदिल पर्यटकों की जान बचाने की कोशिश कर रहे थे। वह आतंकियों से भिड़े, उन्हें रोकने का प्रयास किया — लेकिन इस संघर्ष में उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी। आदिल के पिता, सैयद हैदर शाह ने बताया कि उनका बेटा घर का इकलौता कमाने वाला था। “उसका फोन बंद आ रहा था, फिर जब चला भी, तो कोई जवाब नहीं मिला। पुलिस स्टेशन से पता चला कि वह हमले में घायल हो गया था। बाद में शहादत की खबर मिली।”
सोशल मीडिया के फेसबुक पर अमरेंद्र कुमार सिंह, जो उक्त अवसर पर वहीँ थे और प्रत्यक्षदर्शी भी थे, लिखा है: "जो बेकसूर लोग मारे गए जिनमें कम से कम 3 घोड़े वाले भी थे उनके लिए बेहद दुःख और गुस्सा भी है। घटनास्थल से सिर्फ 300 से 400 मीटर पर घोड़े पर मोना और हम थे, अचानक गोलियों की तरतराहट और भागते लोग देख तुरंत समझ आ गया और जान प्राण ले कर हमारा भी घोड़ा वाला हमको ले कर भागा। फिर वापस होटल जो पहलगाम में ही था उसमें आ गया। टूर कल से ही शुरू हुआ था और पहले दिन ही ये सब हो गया, फिर आगे का सारा प्रोग्राम छोड़ आज का टिकट ले कर वापस हो रहे हैं, फ्लाइट शाम की है अभी ही एयरपोर्ट आ गया। आपसे अनुरोध है किसी बहकावे में न आवे , न्यूज में सुना रेकी किया गया था, जब पता था तो होने क्यों दिए, वहां किसी भी सिक्योरिटी फोर्स से एक भी फोर्स की तैनाती नहीं थी। खैर अब तो राजनीति चलती रहेगी कोई बोल रहा है जाति नहीं धर्म पूछा आदि आदि। ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है।"
इस आतंकी हमले में जान गंवाने वालों में नेपाल और यूएई के नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा एक आईबी ऑफिसर और एक नेवी के लेफ्टिनेंट विनय नरवाल भी पहलगाम आतंकी हमले में अपनी जान गंवाई। बताया जा रहा है कि कुल चार आतंकियों ने इस वारदात को अंजाम दिया, जिसमें से तीन पाकिस्तानी और एक लोकल कश्मीरी हैं।
